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This Article is From Apr 02, 2026

अमेरिका नहीं UAE, ग्रीस, चीन जैसे देशों को होर्मुज बंद होने से नुकसान, जानिए भारत और अन्य देशों का हाल

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से जो लड़ रहे हैं, वो तो परेशान हैं ही, मगर पूरी दुनिया भी हलकान है. तेल-गैस दुनिया का सबसे ज्यादा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था, मगर युद्ध शुरू होने के बाद से वो ब्लॉक है. इससे दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत हो रही है.

अमेरिका नहीं UAE, ग्रीस, चीन जैसे देशों को होर्मुज बंद होने से नुकसान, जानिए भारत और अन्य देशों का हाल
होर्मुज संकट अब पूरी दुनिया का संकट बनता जा रहा है.
  • होर्मुज के बंद होने से ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात और चीन की शिपिंग कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हुईं हैं
  • ग्रीस की कंपनियों के कम से कम 75 मालवाहक जहाज इस जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, जिनमें 30 तेल-गैस टैंकर हैं
  • चीन की कंपनियों के इस क्षेत्र में 74 मालवाहक जहाज हैं, जिनमें 25 तेल और गैस टैंकर और शेष कंटेनर जहाज हैं

ब्लूमबर्ग और समुद्री यातायात संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात और चीन की शिपिंग कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हुईं हैं. पिछले दिन होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम से लगभग 670 मालवाहक जहाजों ने संकेत भेजे, जिनमें से 120 जहाज पास के संयुक्त अरब अमीरात (संयुक्त अरब अमीरात) के थे, जो कुल जहाजों का लगभग 18 प्रतिशत है.

ईरान युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए. इसके बाद ईरान की सेनाओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया. यहां जानिए भारत समेत किन-किन देशों के जहाज फंसे हुए हैं...

ग्रीस

संयुक्त अरब अमीरात के बाद, सूची में अगला स्थान ग्रीस का है. इसकी कंपनियों के कम से कम 75 मालवाहक जहाज युद्ध की शुरुआत से ही जलडमरूमध्य में मौजूद हैं, जो कुल जहाजों का लगभग 12 प्रतिशत है. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, इन जहाजों में से लगभग 30 तेल या गैस टैंकर हैं.

चीन

ऐसा माना जा रहा था कि चीन को इस युद्ध से बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हो रहा है. मगर, आंकड़ों के अनुसार, चीनी कंपनियों के इस क्षेत्र में 74 मालवाहक जहाज हैं, जिनमें से 25 तेल और गैस टैंकर हैं. शेष कंटेनर जहाजों जैसे शुष्क मालवाहक जहाज हैं.

जापान

जापानी कंपनियों के जलडमरूमध्य में कम से कम 23 तेल और गैस जहाज और 16 शुष्क मालवाहक जहाज हैं. इसके अलावा, हांगकांग के 25 जहाज - 13 तेल और गैस, 12 शुष्क मालवाहक - भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं.

भारत

इस क्षेत्र में भारत स्थित कंपनियों के 24 तेल और गैस पोत हैं. इसके साथ ही सिंगापुर और दक्षिण कोरिया की कंपनियां भी प्रभावित हुई हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से उनके क्रमशः 29 और 22 मालवाहक पोत फंसे हुए हैं. वियतनाम के भी तीन बड़े गैस वाहक पोत इस क्षेत्र में हैं.

तेल और गैस

युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज में लगभग 50 विशाल कच्चे तेल वाहक पोत (VLCC) और 11 विशाल गैस वाहक पोत फंसे हुए प्रतीत होते हैं. दक्षिण कोरिया के सात VLCC हैं, चीन और जापान की कंपनियों के छह-छह और ग्रीस के पांच हैं.

ईरान से जुड़े पोत

समुद्री खुफिया फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से मालवाहक पोतों द्वारा की गई 225 यात्राओं में से 40 से अधिक ईरानी पोतों द्वारा की गईं थीं. इसके अलावा, 60 ऐसे पोतों द्वारा की गईं थीं, जो ईरान के सीधे स्वामित्व वाले नहीं हैं.

किन देशों के जहाज होर्मुज से निकले 

ग्रीक स्वामित्व वाले जहाजों द्वारा लगभग 35 बार जलडमरूमध्य को पार किया गया है, जिनमें से आठ जहाज एक ही कंपनी, डायनाकॉम टैंकर मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा किए गए हैं. कम से कम 20 चीनी संबद्ध जहाज और 13 भारतीय संबद्ध जहाज भी यहां से निकले हैं. ऐसा लगता है कि कुछ जहाजों ने ईरान द्वारा मित्र देशों के कुछ जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने वाली जांच प्रणाली के माध्यम से जलडमरूमध्य को पार किया है.

किन जहाजों को निशाना बनाया गया

बीमा की अत्यधिक लागत और जान-माल के खतरे को देखते हुए, सैकड़ों जहाज युद्ध समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं. ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्वामित्व जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में हमलों या संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने वाले जहाजों में से लगभग आधे यूरोप या संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े थे.

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