प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को देहरादून स्थित भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेस वार्ता की. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के 12 वर्षों के सफल कार्यकाल में गरीब कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित हुए. सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में 12 वर्षों में भारत ने जनकल्याण, सुशासन, आधारभूत संरचना, आर्थिक सशक्तीकरण, महिला उत्थान, युवा विकास, किसान कल्याण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है. इन वर्षों में शासन की प्रत्येक नीति और योजना का केंद्र बिंदु समाज के अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि, मुद्रा योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं.
'रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान की'
उन्होंने कहा कि 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, महिला सशक्तीकरण, युवा उत्थान और गरीब कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं. उत्तराखंड में भी प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, मानसखंड मंदिर माला मिशन तथा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान के अंतर्गत हुए अभूतपूर्व विकास कार्यों ने देवभूमि को नई पहचान दिलाई है. इन परियोजनाओं ने प्रदेश में कनेक्टिविटी, धार्मिक पर्यटन, तीर्थाटन, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान की है.
25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का काम किया : धामी
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का काम किया है. कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार सिस्टम का एक अहम हिस्सा बन गया था. मोदी सरकार ने इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रक्रिया अपनाई. डीबीटी से लाभार्थियों के खातों में जाने वाले फंड में किसी भी तरह की लीकेज की कोई गुंजाइश नहीं रहती. कांग्रेस की राजनीति तुष्टीकरण की थी और वह वोट-बैंक तक ही सीमित थी. प्रधानमंत्री मोदी ने देश को एक भरोसेमंद और स्थिर सरकार देने के लिए लगातार काम किया है. 2014 से पहले, वैश्विक मंच पर भारत की साख और भरोसे में कुछ हद तक कमी आई थी. देश के भीतर बैंकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हालत खराब थी और कुल मिलाकर शासन-व्यवस्था अस्त-व्यस्त थी. हालांकि, 2014 के बाद देश को प्रधानमंत्री मोदी के रूप में एक पारदर्शी नेतृत्व मिला.
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