नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथित पार्थिव अवशेषों को जापान से भारत लाने की मांग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अनीता बोस फाफ लंबे समय से टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखे नेताजी के बताए जाने वाले अवशेषों को भारत लाकर उन्हें अंतिम सम्मान देने की मांग करती रही हैं. इस मामले का संबंध केवल एक परिवार की भावनाओं से नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चर्चित और रहस्यमयी अध्यायों में से एक से भी जुड़ा हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथित पार्थिव अवशेषों को भारत लाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने इस मामले पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है. याचिका नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ की ओर से दाखिल की गई है.
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जनवरी में अनीता बोस द्वारा किया गया वीडियो
VIDEO | Germany: On Netaji Subhash Chandra Bose's birth anniversary, daughter Anita Bose Pfaff appeals for repatriation of father's mortal remains in Japan temple for 'final and fitting disposal' in India.
— Press Trust of India (@PTI_News) January 23, 2026
(Source: Third Party)#NetajiSubhasChandraBose #NetajiJayanti pic.twitter.com/vjRsub8ynI
रेंकोजी मंदिर में रखे हैं कथित अवशेष
अनीता बोस फाफ की मांग है कि जापान की राजधानी टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखे नेताजी के बताए जाने वाले अवशेषों को भारत लाया जाए. उनका कहना है कि नेताजी को भारत की धरती पर अंतिम सम्मान मिलना चाहिए. इस मांग को लेकर वह वर्षों से प्रयास करती रही हैं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि यदि कानूनी वारिस स्वयं अदालत के समक्ष आते हैं तो उनकी भावनाओं और मांगों पर विचार किया जा सकता है. इसके बाद अनीता बोस फाफ ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
नेताजी की मौत आज भी विवाद और रहस्य का विषय
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु को लेकर दशकों से अलग-अलग दावे और विवाद सामने आते रहे हैं. सामान्य रूप से यह माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ताइपे में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी. दो जांच आयोग भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि विमान दुर्घटना में ही नेताजी का निधन हुआ था. हालांकि न्यायमूर्ति एम.के. मुखर्जी आयोग ने इस निष्कर्ष से असहमति जताई थी और कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि नेताजी की मृत्यु उसी विमान दुर्घटना में हुई थी.
अदालत ने पहले भी जताई थी चिंता
मार्च में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि नेताजी देश के महानतम नेताओं में से एक थे और पूरा देश उनके बलिदान को नमन करता है. हालांकि अदालत ने यह सवाल भी उठाया था कि जिन अवशेषों को नेताजी का बताया जाता है, उनकी प्रामाणिकता को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है, क्योंकि उनकी मृत्यु कब और कहां हुई, इसे लेकर आज भी मतभेद हैं.
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