- प्रसून जोशी ने NDTV India.AI Summit में तकनीक, रचनात्मकता और इंसानी संवेदना पर एक प्रभावशाली कविता सुनाई
- उनकी कविता में भविष्य की ऐसी दुनिया का चित्रण था जहां तकनीक और मनुष्य की रचनात्मक आत्मा साथ-साथ विकसित होगी
- कविता में यह दर्शाया गया कि AI के युग में भी मनुष्य की संवेदनशीलता और अनुभव की अहमियत बनी रहेगी
NDTV India.AI Summit 2026 के मंच पर मशहूर गीतकार, लेखक और कवि प्रसून जोशी ने तकनीक, रचनात्मकता और इंसानी संवेदना के बदलते दौर पर एक बेहद खूबसूरत कविता सुनाई. प्रसून जोशी की इस कविता ने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. सभागार में मौजूद दर्शकों ने उनके हर शब्द को ध्यान से सुना और कविता खत्म होते ही तालियों की गड़गड़ाहट लंबे समय तक गूंजती रही.
प्रसून जोशी ने अपनी विशिष्ट संवेदनशीलता और गहराई से यह कविता पढ़ी. उनकी इस कविता की ये खासियत है कि ये एक ऐसी कविता है जो तकनीक की तेज रफ़्तार और मनुष्य की रचनात्मक आत्मा के भविष्य को एक साथ जोड़ती है.
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प्रसून जोशी की कविता, AI के युग में हम और हमारी रचना
वो कहते हैं कलम मौन हो जाएगी, कूचिया और रंग एक दूसरे से नहीं मिलेंगे
कूचिया और रंग एक दूसरे से नहीं मिलेंगे
वो कहते हैं कलम मौन हो जाएगी, कूचिया और रंग एक दूसरे से नहीं मिलेंगे
स्वर कंठ की गुफाओं से निकल कर आभासी दुनिया में बस जाएंगे
कृतियां स्वयम्भू हो जाएगी, रचनाएं स्वयं ही गर्भ धारण करेंगी
वो कहते हैं सृजन स्वत: ही होगा, दृश्य और दर्शन का अंतर मिट जाएगा
ध्वनि स्वयम को उत्पन कर स्वयं को ही सुनेगी
तब हम तुम क्या कर रहे होंगे? हम तुम साक्षी बन जाएंगे, हम तुम साक्षी बन जाएंगे
जो किसी स्रोत से फूटी धारा को कल कल चलचल बहते देख रहे होंगे
NDTV India.AI Summit के इस सत्र में प्रसून जोशी की कविता ने दर्शकों को तकनीक और मानवीय रचनात्मकता के बदलते स्वरूप पर गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया. उनके शब्दों ने यह याद दिलाया कि भले चाहे तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन मनुष्य का अनुभव, संवेदना और साक्षी बनने की क्षमता हमेशा केंद्र में रहेगी.
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