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This Article is From Aug 23, 2024

शिव शक्ति प्वाइंट को चूमेगा भारत का चंद्रयान-4, ISRO चीफ ने बता दिया पूरा प्लान

भारत का चौथा मून मिशन यानी चंद्रयान-4 चार साल बाद यानी 2028 के आस-पास लॉन्च हो सकता है. अगर चंद्रयान-4 सफल होता है, तो भारत चांद की सतह से सैंपल वापस धरती पर लाने वाला चौथा देश बन जाएगा.

शिव शक्ति प्वाइंट को चूमेगा भारत का चंद्रयान-4, ISRO चीफ ने बता दिया पूरा प्लान
चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी.
नई दिल्ली:

स्पेस में चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) मिशन की सफलता के एक साल पूरे होने पर देश आज अपना पहला नेशनल स्पेस डे (National Space Day) मना रहा है. चंद्रयान-3 के बाद अब इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4 Launching)की तैयारी में जुट गया है. ISRO का ये स्पेसक्राफ्ट न सिर्फ चंद्रमा पर लैंडिंग करेगा, बल्कि वहां से चट्टान और मिट्टी के सैंपल भी लेकर आएगा. ISRO के चीफ एस सोमनाथ ने इसकी जानकारी दी है. अगर चंद्रयान-4 सफल होता है, तो भारत चांद की सतह से सैंपल वापस धरती पर लाने वाला चौथा देश बन जाएगा.

नेशनल स्पेस डे पर आइए जानते हैं ISRO का चंद्रयान-4 को लेकर क्या है प्लान? कब होगी इसकी लॉन्चिंग? ISRO के क्या-क्या हैं अपकमिंग प्रोजेक्ट्स:-

कब होगी लॉन्चिंग?
भारत का चौथा मून मिशन यानी चंद्रयान-4 चार साल बाद यानी 2028 के आस-पास लॉन्च हो सकता है. ISRO चीफ ने एस सोमनाथ ने बताया, "हमने चंद्रयान-4 का डिजाइन तैयार कर लिया है... यानी चांद से मिट्टी के सैंपल धरती पर कैसे लाए जाएंगे. इसकी डिटेलिंग हो चुकी है. अभी हमारे पास इतने ताकतवर रॉकेट नहीं है कि सब कुछ एक साथ ले जा सके, इसलिए हम इसे कई बार में लॉन्च करने की प्लानिंग कर रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए हमें स्पेस में ही स्पेसक्राफ्ट के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने की क्षमता (डॉकिंग) विकसित करनी होगी. ये जोड़ने की क्षमता पृथ्वी की कक्षा में भी और चांद की कक्षा में भी काम करेगी. हम इसी क्षमता को विकसित कर रहे हैं. इस साल के अंत में स्पेडेक्स नाम का एक मिशन है, जिसका मकसद यही डॉकिंग क्षमता को प्रदर्शित करना है."

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350 किलोग्राम का होगा रोवर 
ISRO के मुताबिक, चंद्रयान-4 में 350 किलोग्राम का रोवर तैनात किया जाएगा. चंद्रयान-4 मिशन चंद्रमा की सतह से पत्थर और मिट्टी का सैंपल लेकर आएगा. इसमें सॉफ्ट लैंडिंग होगी. डॉ. एस. सोमनाथ ने कहा कि हमने चंद्रयान-4 की सारी प्लानिंग हो चुकी है. उसे कैसे लॉन्च करेंगे. कौन सा हिस्सा कब लॉन्च होगा.  

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धरती की तरफ भी आएगा मॉड्यूल
चंद्रयान-4 की लैंडिंग चंद्रयान-3 की तरह ही होगी. हालांकि, सेंट्रल मॉड्यूल परिक्रमा करने वाले मॉड्यूल के साथ डॉक कर वापस धरती की तरफ भी आएगा. वायुमंडल में फिर से प्रवेश कर सेंट्रल मॉड्यूल सैंपल गिराकर धरती के ठीक ऊपर परिक्रमा करने वाले मॉड्यूल से अलग हो जाएगा.

इंसानों की कॉलोनी बसाने के प्रयासों में मदद मिलेगी
ISRO चीफ ने कहा, "हमारे पास चंद्रमा की सतह पर इंसान को भेजने के लिए अगले 15 साल हैं. चांद की सतह से लिए सैंपल के एनालिसिस से मिलने वाले डेटा से चांद की सतह पर पानी जैसे संसाधनों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है. इससे भविष्य में इंसानों की कॉलोनी बसाने की कोशिशों को जोर मिल सकता है." 

2028 में चंद्रयान-4 मिशन में ISRO भारत के हेवी-लिफ्ट GSLV MK III या LVM3 लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल कर सकती है. हालांकि, चट्टानों के सैंपल को सुरक्षित रूप से वापस धरती पर लाने पर ही पूरे मिशन को सफल माना जाएगा. 

4 फेज में हुई थी चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग
ISRO ने 14 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग की थी. आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से LVM3 रॉकेट के जरिए इसे स्पेस में भेजा गया था. चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी. ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है. इस मिशन के तीन हिस्से थे- प्रोपल्शन मॉड्यूल, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर. चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग 4 फेज में हुई थी.

23 अगस्त 2023 को 30 किमी की ऊंचाई से शाम 5 बजकर 44 मिनट पर ऑटोमैटिक लैंडिंग प्रोसेस शुरू की और अगले 20 मिनट में सफर पूरा कर लिया था. चंद्रयान-3 ने 40 दिन में 21 बार पृथ्वी और 120 बार चंद्रमा की परिक्रमा की.

चांद पर भारत के अब तक के मिशन
भारत ने चांद पर अब तक 3 मिशन किए हैं. पहला मिशन चंद्रयान-1 था, जिसे 2008 में लॉन्च किया गया था. इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी, जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला. इसके बाद 2019 में चंद्रयान-2 चांद के करीब पहुंचा, लेकिन लैंड नहीं कर पाया. इसके बाद 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया. जिस जगह पर लैंडिंग हुई, उस जगह को पीएम मोदी ने शिव शक्ति पॉइंट नाम दिया है.

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कब हुई ISRO की स्थापना?
साइंटिस्ट डॉ. विक्रम साराभाई ने 1962 में इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (INCOSPAR) बनाई. डॉ. साराभाई के नेतृत्व में INCOSPAR ने तिरुवनंतपुरम में थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (TERLS) की स्थापना की गई. इन्कोस्पार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के तहत काम करती थी. 15 अगस्त 1969 इसका नाम इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन कर दिया गया. यानी इसी दिन ISRO की स्थापना हुई. 

ISRO का आगे का क्या है प्लान?
-चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब ISRO चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 की तैयारी कर रहा है. ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इसकी जानकारी दी थी. 
-चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशन में चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद चंद्रमा के पत्थरों और मिट्टी को पृथ्वी पर लाना, चंद्रमा से एक अंतरिक्ष यान को लॉन्च करना और सैंपल को पृथ्वी पर वापस लाना शामिल है. 
-ISRO का गगनयान मिशन इस साल दिसंबर में लॉन्च होने वाला है. ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसके तहत 4 एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में जाएंगे. गगनयान में 3 दिनों का मिशन होगा, जिसके तहत एस्ट्रोनॉट्स के दल को 400 KM ऊपर पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा. इसके बाद क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित रूप से समुद्र में लैंड कराया जाएगा.
-ISRO अगले पांच साल में अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स की पूरी सीरीज लॉन्च करने की भी योजना बना रहा है.
-वहीं, मिशन वीनस (Mission Venus)को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. हम मिशन का ISRO री-वैल्यूवेशन करेगा.

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अंजलि कर्मकार
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