- दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी भीषण आग में 21 लोग जलकर मारे गए और 40 से अधिक घायल हुए
- पहाड़गंज इलाके में लगभग आठ सौ होटल हैं, जिनमें से कई फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करते हैं
- नए होटल में आग से बचाव के लिए दो सीढ़ियां, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम आदि लगाए जा रहे हैं
दिल्ली के मालवीय नगर की एक तंग गली में नियम-कानून ताक पर रखकर चल रहे होटल में भीषण आग लगी और 21 लोग जलकर मर गए. हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए. दिल्ली में पिछले कुछ सालों में होटल व्यवसाय इतनी तेजी से फैला है कि मालवीय नगर ही नहीं, हर दूसरे इलाके में होटलों की कतार नजर आती है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सटे पहाड़गंज इलाके को ही लें तो यहां 800 की संख्या में होटल हैं. इनमें से कई होटल फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और मालवीय नगर जैसे हादसे को ही खुला न्योता दे रहे हैं.
पहाड़गंज गेस्ट हाउस ऑनर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट विशाल नारंग कहते है कि मालवीय नगर होटल में आग की घटना बेहद दुखद है. ऐसे होटल्स के मालिकों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने बताया कि पहाड़गंज में इस समय 800 से ज्यादा होटल्स हैं. यहां संख्या लगातार बढ़ रही है. नए होटल्स अग्निशमन नियम (Fire safety rules) का ध्यान में रखकर ही बनाए जा रहे हैं. हर होटल में दो सीढि़यां बनाई जा रही हैं, ताकि आग लगने पर आसानी से निकला जा सके. इसके अलावा फायर अलार्म्स, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, होज रील व हाइड्रेंट और इमरजेंसी लाइट हर नए होटल लगाई जा रही हैं.

नारंग हालांकि इसके बाद जो बताते हैं वो रोंगटे खड़े करने वाला सच है. उनके मुताबिक कई पुराने होटल्स में ये फायर सेफ्टी रूल्स नहीं हैं. कई होटल बेहद तंग गलियों में हैं. जहां तक फायरब्रिगेड की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाती है. ऐसे में खतरा, तो हमेशा बना रहता है. हालांकि, ऐहतियात के तौर पर पहाड़गंज में हर होटल की छत पर 5000 लीटर की पानी की टंकी लगी हुई है, जिसे आग लगने की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है."
खतरे की घंटी पहाड़गंज के होटल्स
पहाड़गंज की लगभग हर गली में आपको एक-दो नहीं बल्कि कई-कई होटल मिल जाएंगे. इनमें से कुछ तो ऐसी गलियों में हैं, जहां कार तो छोड़िए दो स्कूटर भी बड़ी मुश्किल से निकल पाते हैं. कई होटल्स मेन सड़क से बेहद अंदर हैं. इन होटलों तक सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंचती ऐसे में यहां अगर कोई अनहोनी होती है तो उसका असर सोचने में ही डर लगता है.

कई होटलों के नीचे खुले हैं किचन
नियमों के मुताबिक, 15 मीटर से ऊंची या 1000 वर्ग मीटर से बड़ी सभी होटल बिल्डिंग्स को फायर एनओसी लेना जरूरी होता है. होटल के बेसमेंट में किचन या रेस्तरां चलाना भी गैरकानूनी हैं. लेकिन पहाड़गंज के कई होटल्स इन नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं. कई होटल्स के नीचे किचन बने हुए हैं. इन किचन से ही आसपास के होटल्स में ठहरे लोगों को खाना पहुंचाया जाता है. ये किचन खतरे की घंटी हैं.

पहाड़गंज के होटलों में ठहरना क्यों पसंद करते हैं मेहमान
पहाड़गंज सेंट्रल दिल्ली में आता है और यहां से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन कुछ ही कदमों की दूरी पर है. वहीं, दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस भी सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर है. इसके अलावा, लालकिला, जामा मस्जिद, इंडिया गेट, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, करोल बाग मार्केट और आईएसबीटी भी सिर्फ 5 किलोमीटर के दायरे में है. होटल्स की संख्या ज्यादा होने के कारण कॉम्पिटिशन काफी है, इसलिए रेट बहुत कम है. यहां 500 रुपये में भी नॉन एसी रूम मिल जाता है. ऐसे में ज्यादातर पर्यटक पहाड़गंज में ही ठहरना पसंद करते हैं.

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मालवीय नगर और इसके आसपास के इलाकों में नियमों का उल्लंघन कर रहे होटल्स की जांच के आदेश दे दिए हैं. लेकिन खतरा सिर्फ मालवीय नगर तक सीमित नहीं है. पहाड़गंज जैसे इलाके भी ऐसी ही सख्त जांच की मांग करते हैं. इसके लिए इन होटल्स में फायर अलार्म बजने का इंतजार करना गंभीर हो सकता है.
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