"पेपर लीक करने वाले सबसे बड़े अपराधी होते हैं, क्योंकि वो न सिर्फ युवा छात्रों की जिंदगी तबाह करते हैं, बल्कि उनके परिवार वालों को भी बर्बाद कर देते हैं. उन्हे फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए, उससे कम कुछ भी नहीं." ये शब्द महाराष्ट्र के नागपुर की रहने वाली नीलम चतुर्वेदी के हैं. पिछले दिनों नीट पेपर लीक के बाद उनकी बेटी आकांक्षा चतुर्वेदी ने खुदकुशी कर ली थी.
एनडीटीवी के साथ खास बातचीत में नीलम चतुर्वेदी कहती हैं कि परिवार उस सदमे से अब तक उबर नहीं पाया है. ऐसा लगता है कि आकांक्षा के साथ-साथ हमारा सब कुछ खत्म सा हो गया है. उन्होंने बताया कि बेटी नीट की तैयारी कर रही थी और उसकी पढ़ाई के लिये परिवार ने खेत और गहने बेच दिए गए. अब न आकांक्षा है और न ही कुछ और बचा है. ऐसा महसूस होता है कि परिवार बर्बाद हो गया है. हमें यह सजा क्यों दी गई?
'पुख्ता सिस्टम बनाना जरूरी'
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नीलम चतुर्वेदी का कहना है कि यह पहला कदम है, लेकिन इससे आकांक्षा नहीं वापस आयेगी. जो पेपर लीक के दोषी हैं, उन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए. इससे कम कुछ भी नहीं होना चाहिए.
पेपर लीक के मामले कई बार, कई राज्यों से सामने आए हैं. क्या प्रतियोगी परीक्षाओं में दोबारा पेपर लीक कभी ना हो, इसके लिए पुख्ता सिस्टम बनाना जरूरी नहीं? इस सवाल पर आकांक्षा की मां कहती हैं कि हां, यह सबसे जरूरी है. यही होना चाहिए.
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पुलिस से मांगी आंदोलन करने की अनुमति
पेपर लीक के बाद आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर में खुदकुशी कर ली थी. बाद में उसका सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था. छात्रा ने खुद को एग्जाम की आगे की तैयारी के लिए खुद को असमर्थ बताया था और मां-बाप से माफी मांगी थी.

नागपुर के संविधान चौक में आंदोलनकर्ताओं के बीच नीलम चतुर्वेदी अपनी बेटी आकांक्षा का फोटो अपने हाथ मे उठाए पहुंची थीं. इस दौरान, वहां का माहौल काफी गंभीर हो गया था. अपनी मांग को लेकर रविवार, 26 जुलाई को शाम चार से आठ बजे तक नागपुर के संविधान चौक में धरना आंदोलन करने के लिए उन्होंने नागपुर पुलिस से अनुमती मांगी है.
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