- मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने पवनराजे निंबालकर की 2006 की हत्या मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया
- निंबालकर और उनके ड्राइवर की हत्या नवी मुंबई के कलंबोली में दो शूटरों ने कार रोककर गोलीबारी कर की थी
- 20 साल से अधिक समय तक चले ट्रायल में अन्ना हजारे सहित 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे
मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को महाराष्ट्र कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की 2006 में हुई हत्या के मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. 3 जून 2006 को 41 साल के निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी मुंबई से उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जा रहे थे. तभी नवी मुंबई के कलंबोली में दो शूटरों ने उनकी कार को रोका और गोलीबारी की, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के इस मामले में जिन लोगों पर मुकदमा चला, उनमें निंबालकर के चचेरे भाई और NCP के पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल भी शामिल थे, जो अब 86 साल के हैं.

पद्मसिंह पाटिल 16 जून 2026 को सीबीआई स्पेशल कोर्ट में कुछ ऐसे पेश हुए.
शुरुआत में पारसमल जैन ने निंबालकर की हत्या के लिए शुक्ला और मंडाडे से 30 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट लिया था. बाद में उन्हें माफी दे दी गई और वे अन्य आरोपियों के खिलाफ सरकारी गवाह बन गए.
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सीबीआई जांच
नवी मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच से असंतुष्ट होकर, निंबालकर के परिवार ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था. कोर्ट के दखल के बाद, जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी गई. 2009 में, CBI ने चार्जशीट दाखिल की जिसमें पदमसिंह पाटिल को हत्या का मुख्य आरोपी और साजिशकर्ता बताया गया.
CBI के अनुसार, यह साजिश राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण रची गई थी. जांचकर्ताओं का आरोप है कि पाटिल को लगता था कि निंबालकर की बढ़ती लोकप्रियता उस्मानाबाद जिले में उनके राजनीतिक प्रभाव के लिए खतरा है और उन्हें रास्ते से हटाने के लिए 30 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि इसके पीछे एक वजह निंबालकर का टेरना शुगर फैक्टरी के मैनेजमेंट का विरोध करना भी था. पाटिल ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है मगर उनको जून 2009 में गिरफ्तार किया गया था. अलीबाग की एक सेशंस कोर्ट ने उसी साल सितंबर में उन्हें जमानत दे दी थी.
एक लंबा ट्रायल
इस मामले में फैसला आने में 20 साल से ज्यादा का समय लगा. ट्रायल जुलाई 2011 में शुरू हुआ, जिसके दौरान स्पेशल कोर्ट ने भ्रष्टाचार-विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत 128 गवाहों के बयान दर्ज किए. इस मामले में हज़ारे का नाम तब सामने आया, जब पारसमल जैन ने कबूल किया कि पाटिल ने उसी समय उस कार्यकर्ता को खत्म करने का कॉन्ट्रैक्ट भी दिया था. हजारे ने पाटिल से मिली धमकियों के बारे में गवाही दी थी.

पवनराजे निंबालकर की तस्वीर.
यह ट्रायल स्पेशल CBI कोर्ट में हुआ, जिसकी अध्यक्षता एडिशनल सेशंस जज सत्यनारायण नवलंदर ने की. इस कार्यवाही में कई सालों तक चले दस्तावेजी सबूत, गवाहों के बयान और बहसें शामिल थीं. शुरू में उम्मीद थी कि कोर्ट पिछले महीने ही अपना फैसला सुनाएगी, लेकिन इसे 16 जून तक टाल दिया गया. हालांकि, उस दिन जज ने मामले की सुनवाई 20 जून तक के लिए टाल दी और कहा कि फैसला पूरा करने में उन्हें दो-तीन दिन और लगेंगे. CBI ने कहा कि वह हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देगी, क्योंकि उसने आरोपी के खिलाफ "बहुत अच्छे सबूत" पेश किए थे.
पवनराजे निंबालकर कौन थे?
पवनराजे निंबालकर उस्मानाबाद जिले के एक प्रमुख कांग्रेस नेता थे. वे एक लोकप्रिय राजनीतिक हस्ती के तौर पर उभरे थे और उन्हें उस इलाके में वरिष्ठ NCP नेता पद्मसिंह पाटिल के दबदबे को चुनौती देने वाले के रूप में देखा जाने लगा था. मुकदमे के दौरान दर्ज गवाही के मुताबिक, निंबालकर ने शुरुआत में पाटिल के समर्थन से राजनीति में तरक्की की थी और टेरना शुगर फैक्टरी व उस्मानाबाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंक जैसे सहकारी संस्थानों में पद संभाले थे. हालांकि, जैसे-जैसे निंबालकर का राजनीतिक प्रभाव बढ़ा, दोनों नेताओं के बीच रिश्ते बिगड़ते चले गए. निंबालकर के बेटे और शिवसेना (UBT) के सांसद ओमराजे निंबालकर ने बाद में अदालत को बताया कि जब दोनों गुटों के बीच रिश्ते खराब हुए, तो उनके पिता ने पाटिल के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी.
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