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This Article is From Oct 31, 2025

बार-बार दिखाता था गन, मुंबई में बच्चों के साथ बंधक दादी ने बताया अंदर 3 घंटे क्या कुछ हुआ

Mumbai Hostage: दादी का कहना है कि आरोपी रोहित ने चार दिन में पता लगा लिया था कि कौन बच्चे अमीर हैं और कौन गरीब, जिसके बाद उसने छोटे और अमीर बच्चों को ऊपर (दूसरे माले पर) ले जाकर बंधक बनाया. उनको शक है कि इस साजिश में रोहित के साथ कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं.

बार-बार दिखाता था गन, मुंबई में बच्चों के साथ बंधक दादी ने बताया अंदर 3 घंटे क्या कुछ हुआ
मुंबई में कैसे बनाया बच्चों को बंधक, चश्मदीद ने बताया.
  • मुंबई में बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाने जाने का खौफनाक मंजर एक चश्मदीद महिला ने बयां किया है.
  • कोल्हापुर की बुजुर्ग महिला अपनी पोती के साथ ऑडिशन के लिए मुंबई आई थीं और बंधक बनाये गए बच्चों में शामिल थीं.
  • आरोपी ने अमीर और गरीब बच्चों को अलग-अलग जगहों पर रखा. वह उनको बार-बार बंदूक दिखाता था.
मुंबई:

मुंबई में 17 बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाए जाने का खौफनाक मंजर एक चश्मदीद ने बयां किया है. बंधकों में शामिल एक बच्चे की दादी ने होस्टेड कांड की डरा देने वाली पूरी कहानी बताई कि कैसे बच्चों को कमरे में ले जाया गया. इस दौरान उनके साथ क्या हुआ. कोल्हापुर की बुज़ुर्ग महिला चश्मदीद और पीड़िता मंगल पाटनकर ने बताया कि आरोपी शूटिंग का बोलकर कमरे में ले गया था. बुजुर्ग ये सब इसलिए बता सकीं क्यों कि बंधक बनाये गए 17 बच्चों में कोल्हापुर से आईं मंगल पाटनकर नाम की एक दादी और उनकी पोती भी शामिल थी.

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दादी ने सुनाई बच्चों को बंधक बनाने की खौफनाक कहानी

दादी ने बताया कि वह अपनी पोती के साथ ऑडिशन के लिए कोल्हापुर से मुंबई आई थीं. ऑडिशन के बाद आरोपी रोहित आर्या ने उनसे कहा था कि शूटिंग दो दिन बाद होगी. शुरुआत में रोहित उनके साथ अच्छा व्यवहार कर रहा था. वह बच्चों को खाने-पीने का सामान भी दे रहा था. बुधवार को उसने एक अजीब हरकत की. उसने उन सभी बच्चों को एक कमरे में जाने और बच्चों के अभिभावकों को बाहर रुकने को कहा.

बच्चों को स्टूडियो के पहले माले पर ले गया

बुजुर्ग महिला ने बताया कि उन सभी को बाहर रोककर उसने गेट पर लॉक लगा दिया. इसके बाद, कुछ बच्चों को वह स्टूडियो के पहले माले पर ले गया. तब जाकर यह पूरा मामला सामने आया. उन्होंने कहा कि कोल्हापुर के स्कूल की तरफ़ से वे लोग ऑडिशन के लिए मुंबई पहुंचे थे. स्कूल के कहने पर विश्वास कर ऑडिशन के लिए आए. बच्चों के माता-पिता को भी ऑडिशन के लिए बुलाया गया था. बता दें कि इस खौफनाक घटना के बाद मंगल पाटनकर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

अमीर और गरीब बच्चों को अलग-अलग रखा

हॉस्टेज कांड की चश्मदीद ने बताया कि आरोपी रोहित ने अमीर और गरीब बच्चों को अलग-अलग रखा था. इस साजिश में उसके साथ और लोग भी शामिल हो सकते हैं. रोहित आर्या बच्चों को "दौड़-भागी", "किडनैपिंग" और "बम-विस्फोट" जैसे सीन की शूटिंग के लिए बुलाता था. शूटिंग के नाम पर सीसीटीवी कैमरे हटवाकर उनकी जगह लाइट लगवा दी गई थी. उसने स्टूडियो में बैठने की जगह को पैक कर दिया और शटर पर दो बड़े-बड़े ताले लगा दिए, ताकि बाहर का कोई अंदर न आए और अंदर का कोई बाहर न जाए.

दादी से बच्चों की पहरेदारी करने को कहा

रोहित के पास एक गन थी, जो वह बच्चों को बार-बार दिखाता था. बुजुर्ग महिला ने बताया कि रोहित ने उनको बच्चों के साथ रखा था. जबकि बाकी लोगों को अलग रखा था. उसने उनसे कहा कि दादी, आप बच्चों पर ध्यान दो. उनको कहीं जाने मत देना. इसलिए उसने उनको वहां बिठाया था. दादी का कहना है कि आरोपी रोहित ने चार दिन में पता लगा लिया था कि कौन बच्चे अमीर हैं और कौन गरीब, जिसके बाद उसने छोटे और अमीर बच्चों को ऊपर (दूसरे माले पर) ले जाकर बंधक बनाया. पीड़ित महिला को शक है कि इस साजिश में रोहित के साथ कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं. उन्होंने उसके साथ ही

बच्चों के अभिभावक रो रहे थे, आरोपी हंस रहे थे

एक काली दाढ़ी वाले मोटे आदमी और प्रियंका नाम की एक महिला का भी ज़िक्र किया है. बंधक संकट के दौरान कमरे में प्रियंका फ़ोन करती और हंसती थी, जबकि बाहर अभिभावक रो रहे थे. बुजुर्ग ने नांदेड़ के देशमुख नाम के एक व्यक्ति का भी ज़िक्र किया है. मंगल पाटनकर ने एनकाउंटर को अच्छा काम बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि आरोपी रोहित की पूरी टीम को पकड़ा जाना चाहिए.

17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या की मौत

बता दें कि मुंबई में 17 बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या को कमांडो और पुलिस टीम ने गोली मार दी. जिसके बाद उसकी मौत हो गई. गुरुवार दोपहर हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. सूत्रों ने NDTV को बताया कि पवई पुलिस को दोपहर 1.45 बजे सूचना मिली कि एक शख्स बच्चों को फुसलाकर स्टूडियो में लाकर बंधक बना लिया गया है. आरोपी इतना शातिर था कि उसने स्टूडियो की खिड़कियों पर सेंसर लगा दिए, ताकि रेस्क्यू के लिए आने वालों का पता चल जाए. लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बच्चों को उसके चंगुल से छुड़ा लिया और रोहित आर्या के सीने में गोली मार दी.

लेखक के बारे में
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पूजा भारद्वाज
Associate Editor -Current Affairs
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