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'एक मंत्री का नाम लूंगा और अब खोलूंगा खेमका हत्याकांड के राज...' : जेल से बाहर आने के बाद पप्पू यादव

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को राजधानी पटना के कोतवाली और बुद्धा कॉलोनी थानों सहित पूर्णिया में दर्ज कुल तीन आपराधिक मामलों में जमानत मिल गई है. इसके बाद पप्पू यादव जेल से बाहर आ गए हैं.

'एक मंत्री का नाम लूंगा और अब खोलूंगा खेमका हत्याकांड के राज...' : जेल से बाहर आने के बाद पप्पू यादव
  • पप्पू यादव को राजधानी पटना के कोतवाली और बुद्धा कॉलोनी थानों में दर्ज तीन आपराधिक मामलों में जमानत मिल गई है.
  • अदालत ने सांसद पप्पू यादव को जेल से बाहर आने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है.
  • जमानत मिलने की खबर से सांसद के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल देखा गया है.
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पटना:

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. कानूनी अड़चनों के बीच, सांसद को राजधानी पटना के कोतवाली और बुद्धा कॉलोनी थानों सहित पूर्णिया में दर्ज कुल तीन आपराधिक मामलों में जमानत मिल गई है. इसके बाद अब  पप्पू यादव जेल से बाहर आ गए हैं.

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव जेल से बाहर आने के बाद एक्स पोस्ट किया, 'न्यायालय ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया! लेकिन मैं इंसाफ़ के किसी लुटेरे को कोई छूट नहीं दूंगा! न्याय के लिए लड़ाई जारी रहेगी. अभी मैं बेउर जेल से निकल फुलवारी जा रहा हूं, जहां एक बेटी एक छात्रा को कोचिंग की छत से फेंक हत्या कर दिया! उनके इंसाफ के लिए मज़बूती से लड़ेंगे.'

पटना बेउर जेल से निकलने पर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मुझे नहीं पता कि प्रशासन ने ऐसा क्यों किया. सरकार में एक दो लोग हैं जिन्होंने बदमाशी की है. एक दिल्ली के नेता, एक बिहार के नेता और एक पुर्णिया के नेता की ये साजिश थी. खेमका हत्याकांड में जो एनकाउंटर हुआ वो गलत बच्चे का हुआ. हमें वो गवाही मिल गई है. बच्चों को 4 बजे निकालकर गोली मारी गई. मैं हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा और केस लड़ूंगा. NEET की बच्ची की लड़ाई मैं रुकने नहीं दूंगा. जिन लोगों ने भी हमारा समर्थन किया मैं उनका ऋणी हूं. मुझे मरवाने की भी कोशिश हुई.

सांसद पप्पू यादव को हाल ही में एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था. बुद्धा कॉलोनी थाना से जुड़े मामले में आरोप है था कि गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस के कार्य में बाधा डाली.

पप्पू यादव 31 साल पुराने पटना स्थित एक मकान पर अवैध कब्जे के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया था. यह मामला 1995 में गर्दनीबाग थाने में तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत दर्ज किया गया था. पप्पू यादव पर आरोप है कि जिस मकान में वह किराये पर रहते थे, उसी मकान में उन्होंने बाद में सांसद कार्यालय खोल लिया, जिसके बाद पीड़ित मकान मालिक ने यह मामला दर्ज कराया. इस मामले में अदालत लंबे समय से पप्पू यादव के खिलाफ वारंट जारी कर रही थी लेकिन वह पिछले 31 साल से अदालत में कथित तौर पर पेश नहीं हो रहे थे. 

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