- कुछ उम्मीदवारों पर हमलों समेत छिटपुट हिंसा की घटनाओं के अलावा इस बार बंगाल का चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा.
- 2023 का पंचायत चुनाव हो या 2021 का विधानसभा चुनाव, यहां काफी हिंसा देखने को मिली थी.
- इस बार हिंसा न के बराबर होने के पीछे अहम वजहों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती बताई जा रही है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में लगभग 91.35 फीसद वोटिंग हुई है. कुल 152 निर्वाचन क्षेत्रों पर हुए मतदान के दौरान गुरुवार कुछ इलाकों से छिटपुट घटनाओं की रिपोर्ट आई हैं लेकिन इस बार मतदान का दिन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा है. पहले की तरह इस बार यहां बड़े स्तर पर हिंसा की घटनाएं न के बराबर हुईं. कुछ इलाकों से मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी खबरें और हमले की छिटपुट घटनाएं भी हुईं, पर शाम 6 बजे जब मतदान समाप्त हुए तो यह दोहरी खुशी लेकर आया. पहला तो यह कि यह अर्से बाद बंगाल में सबसे शांतिपूर्ण चुनाव रहा. वहीं दूसरा यह कि राज्य के हालिया चुनावी इतिहास में यहां रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया.
बता दें कि पहले चरण में राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा. भीषण गर्मी और उमस के बावजूद सुबह से मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की कतार देखी गई और उसका असर मतदान के प्रतिशत पर भी देखने को मिला. दोपहर 1 बजे तक ही राज्य में औसत मतदान प्रतिशत 60 से ऊपर चला गया, तो दोपहर तीन बजे तक यह 78% और शाम छह बजे तक करीब 90% हो गया.
कहां से आईं छिटपुट हिंसा की खबरें?
कुछ उम्मीदवारों पर हमलों समेत छिटपुट हिंसा की घटनाओं के अलावा इस बार बंगाल का चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा. दोपहर के वक्त आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशी अग्निमित्रा पॉल की कार पर पथराव किया गया. तो मुर्शिदाबाद में दो पार्टियों के समर्थकों के बीच झड़प, वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव की घटना हुई, जिसके बाद केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा.
इससे पहले, दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु सरकार के साथ उस समय हाथापाई की गई जब वह गड़बड़ी की खबरों के बाद एक मतदान केंद्र की ओर जा रहे थे. शुभेंदु सरकार ने दावा किया कि राज्य पुलिस की मौजूदगी में उनकी पिटाई की गई और उनके वाहन में तोड़फोड़ की गई. वहीं बीरभूम और मालदा में बीजेपी के चुनाव एजेंटों हमले हुए तो मुरारई में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई. इस घटना में दो लोग घायल हुए.
शांतिपूर्ण चुनाव पर नेता क्या बोले?
नंदीग्राम और भवानीपुर सीट से बीजेपी प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी ने शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की. उन्होंने कहा लोग पहले से अधिक जागरूक हुए हैं और बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की मौजूदगी की वजह से लोगों में डर अब खत्म हो गया है. इसी वजह से युवा और बहने खुलकर सामने आई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस बार माहौल अच्छा है, हम सभी गांवों में घूम रहे हैं.
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने ‘काफी हद तक शांतिपूर्ण' मतदान के लिए निर्वाचन आयोग की सराहना की और आगे भी हिंसा-मुक्त माहौल सुनिश्चित करने का आग्रह किया. सुकांत मजूमदार ने अपने परिवार के साथ दक्षिण दिनाजपुर में वोट डाला.
इस दौरान उन्होंने मुर्शिदाबाद में हुए एक बम विस्फोट का जिक्र भी किया और कहा कि इन जैसे इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, जहां चुनाव के दौरान हथियारों और बमों के इस्तेमाल का इतिहास रहा है. बता दें कि मुर्शिदाबाद के नवादा विधानसभा क्षेत्र में आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर और स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं के बीच टकराव हुआ.
हालांकि इन इलाकों में केंद्रीय बलों की 2,400 से अधिक कंपनियों की तैनाती से अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई और यही वजह है कि हिंसा की घटनाएं इस बार बहुत कम रिपोर्ट की गईं.
बता दें कि 2023 का पंचायत चुनाव हो या 2021 का विधानसभा चुनाव, यहां काफी हिंसा देखने को मिली थी. खास कर चुनावों के बाद यहां बड़े पैमाने पर हिंसा और राजनीतिक हत्या की घटनाएं सुर्खियां बटोरती रही हैं. इसका एक उदाहरण मुर्शिदाबाद में देखने को मिला जब पिछले साल तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता को अज्ञात हमलावरों ने गोली और धारदार हथियार से बुरी तरह कर दिया जिससे उनकी मौत हो गई.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने NDTV के साथ बातचीत में भी यह दावा किया कि इस बार केंद्र सरकार ने बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने की भरपूर कोशिश की है और केंद्रीय बलों की पहले की तुलना में दोगुनी तैनाती की गई है.
हिंसा रोकने के लिए क्या उपाय किए गए?
इसकी सबसे बड़ी वजह यहां केंद्रीय सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती की गई है. शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों को तैनात किया गया.
राज्य में चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कुल 2,407 कंपनियां तैनात की गईं. इन कंपनियों में लगभग 2.4 लाख से 2.5 लाख जवान शामिल हैं, जो किसी भी राज्य के चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती है. सबसे ज्यादा सुरक्षा बल मुर्शिदाबाद जिले में तैनात किए गए, जहां अकेले 316 कंपनियां लगाई गई हैं.
इससे मतदाताओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और हिंसक तत्वों पर लगाम लगी.
इसके अलावा इस बार विशेष प्रशासनिक और न्यायिक सख्ती देखने को मिली. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संवेदनशील क्षेत्रों में व्यवस्था बहाल करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया था. साथ ही, पुलिस ने हिंसक झड़पों के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए कई गिरफ्तारियां भी की हैं.
साथ ही डिजिटल निगरानी और रिपोर्टिंग बढ़ गई है. इसमें सोशल मीडिया और आधुनिक संचार साधनों का उपयोग किया जा रहा है. इससे वहां स्थानीय लोग अब हिंसा की घटनाओं को तुरंत रिकॉर्ड और रिपोर्ट कर पा रहे हैं, जिससे हिंसा फैलाने पर पकड़े जाने का डर बढ़ा है.
इसके अलावा विपक्ष और जनता की जागरूकता भी इसकी एक अहम वजह रही. राजनीतिक दलों ने सुरक्षा की मांग की और जनता डरी नहीं और बढ़चढ़ कर मतदान करने बाहर निकली. हालांकि जमीनी स्तर पर हिंसा को सीमित करने में सबसे बड़ा किरदार केंद्रीय बलों की रिकॉर्ड तैनाती रही.
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