विज्ञापन

RSS प्रमुख भागवत ने की अंतरजातीय विवाह की वकालत, 1942 की ऐतिहासिक शादी को किया याद, इन मुद्दों पर भी बोले

आरएसएस प्रमुख भागवत ने मैसूरु में कहा- ‘‘समाज जाति को याद रखता है, इसलिए राजनीतिक नेता उसका लाभ उठाते हैं. उनका उद्देश्य वोट प्राप्त करना होता है. अगर, उन्हें काम के आधार पर वोट नहीं मिलते तो वे जाति के आधार पर वोट हासिल करेंगे.’’

RSS प्रमुख भागवत ने की अंतरजातीय विवाह की वकालत, 1942 की ऐतिहासिक शादी को किया याद, इन मुद्दों पर भी बोले
When Ambedkar & Golwalkar Blessed an Inter-Caste Couple, Mohan Bhagwat Recalls 1942 Event. (File Photo)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने अंतरजातीय सामाजिक संबंधों और विवाह की वकालत की. उन्होंने महाराष्ट्र में हुए एक अंतरजातीय विवाह का जिक्र करते हुए कहा कि पहला अंतरजातीय विवाह 1942 में महाराष्ट्र में हुआ था. इस विवाह में दो प्रमुख हस्तियों ने आशीर्वाद संदेश भेजे थे- पहले बीआर आंबेडकर और एमएस गोलवलकर (आरएसएस के दूसरे प्रमुख) ने. उन्होंने कहा कि विवाह को व्यक्तिगत बंधन के बजाय एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए. 

सामाजिक जीवन में समानता अपनाए 

आरएसएस प्रमुख भागवत ने यह बातें कर्नाटक के मैसूरु (मैसूर) में गुरुवार को ‘राष्ट्रीय विकास की उत्प्रेरक के रूप में सामाजिक समरसता' विषय पर व्याख्यान देने के बाद आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहीं. उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण नीतियों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन के लिए जनसहयोग और दीर्घकालिक सोच आवश्यक है. उन्होंने कहा कि जाति आधारित राजनीति तभी समाप्त होगी जब समाज स्वयं जातिगत पहचान से ऊपर उठेगा. उन्होंने विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सौहार्द पर जोर दिया और लोगों से नारेबाजी के बजाय आचरण के माध्यम से सामाजिक जीवन में समानता अपनाने का आग्रह किया. 

नेताओं का उद्देश्य वोट प्राप्त करना 

भागवत ने कहा- ‘‘समाज जाति को याद रखता है, इसलिए राजनीतिक नेता उसका लाभ उठाते हैं. उनका उद्देश्य वोट प्राप्त करना होता है. अगर, उन्हें काम के आधार पर वोट नहीं मिलते तो वे जाति के आधार पर वोट हासिल करेंगे.''

'आरएसएस सरकार नहीं' 

जनसंख्या नियंत्रण विधेयक और समान नागरिक संहिता से जुड़े एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा- 'आरएसएस सरकार नहीं, एक सामाजिक संगठन है. उन्होंने कहा कि कोई भी कानून तभी सफल हो सकता है, जब उसे जनता का सहयोग मिले. उन्होंने कहा, पहले लोगों को शिक्षित करना जरूरी है. नीति आवश्यक है, लेकिन ये सफल तभी होगी जब जनता का सहयोग मिलेगा'.

भागवत ने आपातकाल का किया जिक्र 

आपातकाल के दौरान अपनाए गए जनसंख्या नियंत्रण उपायों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि एक समय ऐसी सरकार थी जिसने आपातकाल के दौरान, विशेष रूप से उत्तर भारत में, जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए आक्रामक प्रयास किए थे. लोगों को जबरन नसबंदी के लिए ले जाया गया था, बाद में वह सरकार पूरी तरह से पराजित हो गई. उन्होंने कहा कि भविष्य की जनसंख्या नीतियों को तैयार करने से पहले जनसांख्यिकीय असंतुलन, महिलाओं की शिक्षा, सशक्तीकरण और स्वास्थ्य जैसे सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए. 

लोकतंत्र में सबकुछ धीरे-धीरे होता है 

भागवत ने कहा- 'एक बार नीति तय हो जाने और लोगों को इसके बारे में शिक्षित करने के बाद, यह बिना किसी अपवाद के सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए. यूसीसी को लेकर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पहले से ही ऐसा कानून लागू है और कुछ अन्य राज्यों ने भी इसी तरह के उपाय अपनाए हैं. यह राज्य दर राज्य बढ़ रहा है. शायद, एक दिन यह पूरे भारत में लागू हो जाए, धैर्य रखें. लोकतंत्र में सबकुछ धीरे-धीरे होता है क्योंकि कोई एक व्यक्ति निर्णय नहीं लेता - 142 करोड़ लोग निर्णय लेते हैं'. 

लोगों से मत कहो- वे जाति को भूल जाएं

जातिगत विभाजन पर भागवत ने कहा- राजनीति में बदलाव आने से पहले समाज को स्वयं बदलना होगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को जाति व्यवस्था को भुला देना चाहिए, तब राजनीति अपने आप सुधरेगी. उन्होंने कहा- लोगों से सिर्फ यह मत कहो कि वे जाति को भूल जाएं. अन्यथा वे इसे भूलने की कोशिश में जाति को याद कर लेंगे. इसके बजाय, ऐसा व्यवहार करो मानो जाति का अस्तित्व ही न हो. 

उम्र 2 साल, एक्सपर्ट को दिए 1150 जवाब, 16 सेकंड में बोले अंग्रेजी के 5 सबसे कठिन शब्द, ये है अभिराज का कमाल

सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य सत्य 

धार्मिक सद्भाव के विषय पर आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा- रीति-रिवाजों और परंपराओं में भिन्नता के बावजूद सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य सत्य ही है. समुदाय और धर्म हमारे लिए आवश्यक हैं. सवाल यह नहीं है कि ‘क्या हम ऐसा कर सकते हैं?' क्योंकि सभी धर्म हमें सत्य की ओर ले जाने का प्रयास करते हैं. 

अपनी परंपराओं को संरक्षित रखना चाहिए

आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदू समाज को अनुकरणीय आचरण के माध्यम से अपनी परंपराओं को संरक्षित रखना चाहिए. प्रत्येक हिंदू की अपनी परंपराएं और रीति-रिवाज हो सकते हैं, लेकिन उनके माध्यम से उसे यह आचरण प्राप्त करना चाहिए' 

मेट्रो में अब जमकर करें पार्टी... MP में मिल रही सुविधा, कितना आएगा खर्च, कैसे करें बुकिंग? सबकुछ जानिए

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com