- ईरान ने हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया में अमेरिकी और ब्रिटेन के सैन्य अड्डों पर दो मिसाइलों से हमला किया है.
- रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की ताकत को कम आंका और अब यह उसके लिए चिंता का विषय है.
- लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (रि) ने कहा कि ईरान को संभवतः चीन, रूस या उत्तरी कोरिया की मदद मिल रही है.
ईरान ने अपनी सीमाओं से करीब 4 हजार किलोमीटर दूर हिंद महासागर के बीचों बीच स्थित डिएगो गार्सिया पर दो मिसाइलों से हमला किया है. वाल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, यह दोनों मिसाइलें अमेरिकी और ब्रिटेन के सैन्य अड्डों को निशाना नहीं बना पाई है. ईरान के इस हमले से भले ही दोनों देशों के सैन्य अड्डे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन इसने दोनों बड़ी सैन्य शक्तियों परेशान जरूर कर दिया है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने ईरान की ताकत को कम आंकने की भूल की है. साथ ही वे इस हिम्मत के लिए ईरान की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (रिटायर्ड) ने इस हमले के बाद एनडीटीवी से कहा कि ईरान की इस बढ़ती ताकत को देखकर लोग अब लोग अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सवाल उठाएंगे और सबसे ज्यादा बड़ी आवाज अमेरिका से ही उठेगी. वहीं लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (रिटायर्ड ) ने इस कदम को लेकर ईरान की हिम्मत की दाद दी है.
अमेरिका ने ईरान को कमतर आंका: चोपड़ा
अनिल चोपड़ा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि आज ईरान दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों से एक साथ लड़ रहा है. शुरू में ऐसा लगा कि ये दोनों देश ईरान को आसानी से तबाह कर देंगे, लेकिन जिस तरह से ईरान अपनी मिसाइल क्षमता दिखा रहा है, उसकी जद में अब आधा यूरोप, अरब सागर और हिंद महासागर में मौजूद अमेरिकी ठिकाने भी आ गए हैं. इससे साफ है कि अमेरिका ने ईरान को कमतर आंका है.
चोपड़ा ने कहा कि अब जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक ईरान के पास करीब 6000 बैलेस्टिक मिसाइलों का जखीरा है, जिसमें से उसने अभी तक करीब 600 से 700 का ही इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा कि ईरान की इस बढ़ती ताकत को देखकर लोग अब लोग ट्रंप पर सवाल उठाएंगे. ये सवाल अमेरिकी लोग ही ज्यादा जोर-शोर से उठाएंगे.
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कोई न कोई देश ईरान की मदद कर रहा: कुलकर्णी
वहीं ईरान के इस हमले को लेकर लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (रि) ने ईरान की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि ये काबिले तारीफ है. कौन सोच सकता था कि ईरान अपने यहां से 4000 किलोमीटर दूर अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की हिम्मत कर पाएगा.
कुलकर्णी ने कहा कि इतने सालों प्रतिबंध झेलने के बाद उसके अंदर ऐसी काबिलियत है. साफ है उसके पास ज्ञान है, तकनीक है और कोई न कोई देश उसकी मदद जरूर कर रहा है, जिसकी बदौलत वो यह कर पाया है. उन्होंने कहा कि ईरान के मददगारों में उत्तरी कोरिया, चीन या रूस भी हो सकता है.
साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कभी ऐसा न हो कि वो करीब 12,000 किमी दूर अमेरिका को टारगेट कर दे. इससे ट्रंप पर और दबाव बढ़ेगा. अमेरिकी लोगों को लगेगा कि उसके यहां अब कुछ भी हो सकता है.
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