- दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जुर्माने की राशि में संशोधन करते हुए अधिकतम जुर्माना 5000 रुपये करने की तैयारी
- मेट्रो में लिखावट, ट्रेन के फर्श पर बैठने सहित कई नियम तोड़ने वालों को कड़ी कार्रवाई की तैयारी
- महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में पुरुषों के प्रवेश पर सख्त नियम लागू कर जुर्माने की सीमा बढ़ सकती है
अगर आप दिल्ली मेट्रो से रोजाना सफर करते हैं तो खबर आपके लिए है. डीएमआरसी जुर्माने की राशि में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. अब कोई भी व्यक्ति नियम तोड़ता है तो उसे अत्यधिक 5000 रुपये तक जेब से भरना पड़ सकता है. मेट्रो के डिब्बे में कुछ लिखने, ट्रेन के फर्श पर बैठने और महिलाओं के कोच में पुरुषों की एंट्री पर भी नियम सख्त हो सकते हैं. सरकार ऐसा करने पर विचार कर रही है लेकिन अभी लागू होने में समय लगेगा.
प्रस्ताव में क्या नया?
केंद्र सरकार ने मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. ये बदलाव जन विश्वास (विधियों में संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत किए जा रहे हैं. प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, नशे की हालत में होने, आपत्तिजनक सामान ले जाने या प्रदर्शन करने पर लगने वाले जुर्माने को अब ₹500 से बढ़ाकर ₹2,500 करने का प्रस्ताव दिया है. यह विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने पेश किया था. इन संशोधनों का उद्देश्य कुछ आपराधिक प्रावधानों की जगह मौद्रिक दंड लागू करना, जुर्माने की राशि बढ़ाना, कुछ शब्दों की स्पष्ट परिभाषाएं जोड़ना आदि है.
नशे में होना, थूकना, ट्रेन के फर्श पर बैठने पर बढ़ गई जुर्माने की राशि
धारा 10 में, विधेयक यह प्रस्ताव करता है कि भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 21 का उल्लेख हटाकर उसकी जगह भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2 के खंड (28) का उल्लेख किया जाए. इसके अलावा, धारा 59(1) — जिसमें नशे में होना, उपद्रव करना, थूकना, ट्रेन में फ़र्श पर बैठना या झगड़ा करना शामिल है और धारा 60(1) जिसमें आपत्तिजनक सामग्री ले जाने से संबंधित प्रावधान आता है, इन दोनों में वर्तमान में अधिकतम ₹500 तक के जुर्माने का प्रावधान है. अब इसे बदलकर अधिकतम ₹2,500 तक के दंड का प्रस्ताव किया गया है.
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महिला डिब्बे में घुसे तो 5000 का जुर्माना
यदि कोई यात्री डिब्बों में कुछ लिखता या चिपकाता है और हटाने से मना करता है, तो धारा 62(3) के तहत वर्तमान में लागू 6 महीने तक की कैद, या ₹1,000 तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है. अब इसे बदलकर अधिकतम ₹10,000 के दंड का प्रस्ताव किया गया है. इसी तरह, धारा 64(1) जिसमें अवैध प्रवेश (जैसे महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में घुसना) शामिल है.
वर्तमान में 3 महीने तक की कैद, या ₹250 तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है. इसे बदलकर अधिकतम ₹5,000 के दंड का प्रस्ताव किया गया है. अभी-
➔धारा 59(1) और धारा 60(1) के तहत जुर्माना: ₹200
➔धारा 62(3) के तहत जुर्माना: ₹500
➔धारा 64(1) के तहत जुर्माना: ₹250
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