- मेघालय की यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के ग्यारह में से आठ विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है
- तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है
- UDP के अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने इस्तीफा दे दिया है और अब पार्टी में वे अकेले विधायक रह गए हैं
एक तरफ देश की राजधानी दिल्ली में सियासी माहौल गर्म है तो दूसरी तरफ पूर्वोत्तर मेघालय में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है. मेघालय के क्षेत्रीय दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के 12 में से 11 विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है. खास बात यह है कि मेघालय में मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व में चल रही सरकार में UDP भी शामिल थी, लेकिन पार्टी के 11 में से 8 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया, जबकि तीन विधायक सीएम कोनराड संगमा की एनपीपी में शामिल हो गए हैं. इस लिहाज से इस उठापठक से सरकार को कोई खतरा नहीं है. लेकिन एक पार्टी का वजूद पूरी तरह से बिखरता दिख रहा है.
क्या है मेघालय का सियासी संकट
दरअसल, मेघालय में एनपीपी के प्रमुख कोनरॉड संगमा के नेतृत्व में मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) की सरकार चल रही है. जिसमें UDP भी शामिल थी. लेकिन अक्टूबर-2026 पार्टी के 11 विधायकों ने साथ छोड़ दिया. यह दलबदल कानून की नजरों में पूरी तरह वैध है क्योंकि इसमें दो-तिहाई से कहीं ज्यादा विधायकों ने एक साथ पाला बदला है. इन 11 विधायकों में से 8 विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है, जबकि 3 विधायकों ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) की सदस्यता ले ली है. पार्टी में हुई इस बगावत के UDP के अध्यक्ष और राज्य के कैबिनेट मंत्री मेटबाह लिंगदोह अपनी पार्टी में अकेले विधायक बच गए हैं. अपने साथियों के जाने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मेटबाह लिंगदोह ने 31 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को कैबिनेट मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है.
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मेघालय में मजबूत हुई भाजपा
मेघालय में हुए इस राजनीतिक उठापठक का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को हुआ है. राज्य में बीजेपी के 2 विधायक थे. लेकिन यूडीपी के 8 विधायक शामिल होने से पार्टी के विधायकों की संख्या 10 हो गई है. विधानसभा अध्यक्ष ने भी इनके दलबदल को मान्यता दे दी है. ऐसे में अब मेघालय सरकार में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. जबकि अब सरकार में भी भाजपा की हिस्सेदारी की मांग बढ़ सकती है.
एनपीपी भी मजबूत
भले ही इसे गठबंधन के भीतर का संकट कहा जा रहा हो, लेकिन इस घटनाक्रम से मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की ताकत भी कई गुना बढ़ गई है. यूडीपी के 3 विधायकों ने NPP का दामन थाम लिया है. जिससे 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में NPP की व्यक्तिगत सीटों की संख्या 33 से बढ़कर 36 हो गई है. इसका मतलब है कि संगमा की पार्टी को अब बिना किसी बैसाखी के सदन में अपने दम पर पूर्ण बहुमत (31 का आंकड़ा) हासिल हो चुका है. ह
मेघालय में यूडीपी के टूटने से भले ही सरकार पर कोई संकट नहीं हुआ. लेकिन विधायकों के दलबदल से राज्य के सत्ताधारी गठबंधन में जरुर आने वाले समय में बदलाव दिख सकता है. क्योंकि अब तक संगमा सरकार में यूडीपी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन अब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है. हालांकि कोनराड संगमा अपने दम पर बहुमत भी जुटा चुके हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में मेघालय की राजनीति दिलचस्प हो सकती है.
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