- महाराष्ट्र में एक बार फिर मनोज जरांगे पाटिल ने हड़ताल शुरू कर दी है.
- मनोज जरांगे पाटिल मराठाओं को कुनबी समुदाय में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.
- उनका कहना है कि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो वह मुंबई तक मार्च निकालेंगे.
महाराष्ट्र में मनोज जरांगे पाटिल एक बार फिर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. वह मराठाओं को कुनबी जाति में शामिल करने की मांग पर अड़े हैं. उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज दूसरा दिन है, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो वे मुंबई तक मार्च करेंगे. बता दें कि जरांगे ने शनिवार को जालना जिले में आने वाले गांव अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर अपनी 11वीं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है. वह सरकार से मांग कर रहे हैं कि मराठाओं को कुनबी माना जाए, जिससे महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासत गर्माती दिख रही है.
मराठाओं को आरक्षण दिलाने की मांग
मनोज जरांगे पाटिल का अनशन मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण दिलाने से जुड़ा है. जरांगे पाटिल की मांग है कि सभी पात्र मराठों को 'कुनबी' माना जाए और OBC में शामिल किया जाए. बता दें कि कुनबी महाराष्ट्र में एक कृषि प्रधान समुदाय है, जो OBC में आता है. पिछले साल सरकार की तरफ से गठित शिंदे समिति ने राज्य में लगभग 58 लाख ऐतिहासिक कुनबी रिकॉर्ड खोजे थे. जरांगे का आरोप है कि रिकॉर्ड मिलने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी जानबूझकर मराठा आवेदकों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने में देरी कर रहे हैं. जिसके चलते वह फिर से हड़ताल पर चले गए हैं.
मुंबई तक मार्च करने की चेतावनी
मनोज जरांगे पाटिल का कहना है कि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है. तो वे मुंबई तक मार्च करेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे. मुंबई में भूख हड़ताल करने के बारे में फैसला लेने के लिए 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में उनके नेतृत्व में मराठा समुदाय की कोर कमेटी की बैठक होगी. अगर सरकार 12 सितंबर तक हमारी मांगें मान लेती है, तो मुंबई में प्रस्तावित भूख हड़ताल करने की कोई जरूरत नहीं होगी.
मराठा और कुनबी समुदाय के लिए अलग विभाग बनाने की मांग
एक्टिविस्ट ने राज्य सरकार से मांग की है कि सतारा गजट के आधार पर आरक्षण दिया जाए, पूरे महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं और पिछले आंदोलनों के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजा दिया जाए. उन्होंने मराठा और कुनबी समुदायों के लिए एक अलग राज्य पोर्टफोलियो बनाने और उसमें तुरंत स्टाफ की नियुक्ति करने की मांग की है. अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास महामंडल के जरिए दिए गए लोन पर ब्याज का भुगतान करने की है.
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