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मराठा आरक्षण पर अब आर-पार की लड़ाई, 15 सितंबर से मनोज जरांगे की पदयात्रा

जरांगे ने मराठा समुदाय से अपील की है कि आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें किसी को 'खुन्नस' नहीं देनी है. अगर कोई हमें उकसाए तो भी प्रतिक्रिया न दें."

मराठा आरक्षण पर अब आर-पार की लड़ाई, 15 सितंबर से मनोज जरांगे की पदयात्रा
समाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे
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जालना के अंतरवाली सराटी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने अहम ऐलान किया है. उन्होंने मराठा समुदाय के अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है.

जरांगे ने स्पष्ट किया है कि वह अपना वर्तमान आमरण अनशन नहीं तोड़ेंगे, बल्कि इसी अवस्था में 15 सितंबर को अंतरवाली से मुंबई के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे. यह रैली 19 सितंबर को मुंबई पहुंचेगी, जहां आजाद मैदान में अनशन जारी रहेगा.

जरांगे ने मराठा समुदाय से अपील की है कि आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें किसी को 'खुन्नस' नहीं देनी है. अगर कोई हमें उकसाए तो भी प्रतिक्रिया न दें."

न्यायपालिका का सम्मान करने पर जोर दिया और कहा, "न्यायदेवता गरीबों के पक्ष में है. जब से न्यायपालिका हमारे पक्ष में आई है, मेरा मन बदल गया है. भले ही सरकार का रवैया ठीक न हो, लेकिन न्यायाधीश अच्छा व्यवहार करते हैं. यदि कोई भी शांति भंग करेगा या तोड़फोड़ करेगा, तो मैं आंदोलन नहीं करूंगा."

जरांगे ने चेतावनी दी कि पुलिस उनके शांतिपूर्ण मार्च को रोकने की कोशिश न करे. "हमें रोककर राज्य में अस्थिरता पैदा न करें. अगर पुलिस हमें रोकती है, तो हम शांति से वहीं लेट जाएंगे."

उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी देते हुए कहा, "मराठों को रोककर हमारा गुस्सा मोल न लें, अन्यथा मराठा वोटर बीजेपी से दूर हो जाएगा." उन्होंने आरोप लगाया कि उनके करीबियों पर दबाव डालने के लिए ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है. "मेरे लोगों को ईडी के नोटिस भेजे जा रहे हैं. लेकिन मेरे लोग जेल जाने को तैयार हैं, हम पीछे नहीं हटेंगे."

जरांगे ने कुछ जिला कलेक्टरों, विशेषकर जालना की कलेक्टर आशिमा मित्तल और बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले को निशाने पर लिया.

उन्होंने कहा, "कुछ कलेक्टर सरकार से भी बड़े बन रहे हैं. बावनकुले, कलेक्टरों को हमारे खिलाफ भड़काना बंद करें. कलेक्टरों का काम यह बताना नहीं है कि मराठों को क्या मिलेगा, यह मुख्यमंत्री का काम है. अधिकारी जातिवाद और लिंगभेद न करें."

उन्होंने मंत्री छगन भुजबल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें कैसे पता चला कि कलेक्टर नर्वस हैं. कहा की इस बार मराठा आंदोलन में महिलाएं बड़ी संख्या में मुंबई पहुंचेंगी.

जरांगे ने महिलाओं से अपील की है कि वे मुंबई जाकर सीएम देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे  के घर जाएं और उनकी पत्नियों अमृता फडणवीस और लता शिंदे के साथ 'हल्दी-कुमकुम' कार्यक्रम करें. "उन्हें हल्दी-कुमकुम लगाते हुए आरक्षण दिलाने का संदेश दें. अगर वे घर से बाहर नहीं आईं, तो सवाल उठेगा कि क्या वे हिंदू हैं या नहीं?"

जरांगे ने मराठा युवाओं से कहा कि वे किसी पार्टी या नेता को बड़ा न बनाएं, बल्कि अपने समाज और अपने बच्चों को बड़ा बनाएं. "संकट के समय आपका नेता काम नहीं आता, समाज ही काम आता है. जो नेता इस संघर्ष में सड़क पर न दिखे, उसे चुनाव में हरा दें."

जरांगे ने कहा कि सरकार के पास अभी भी 15 सितंबर तक का समय है. "हम मुंबई पहुंचने से पहले सरकार को रास्ता निकालने का मौका दे रहे हैं. अगर 12 से 15 सितंबर के बीच मांगें मान ली जाती हैं, तो हम मुंबई नहीं आएंगे. लेकिन हम अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे."

जरांगे ने आंदोलनकारियों से अपील की है कि वे अपने साथ जरूरी सामान और दवाइयां रखें. रास्ते में मराठा समुदाय के लोग केवल भोजन और सेवा प्रदान करें, कोई भी किसी को चंदा न दे. उन्होंने यह भी कहा कि "यह मराठों की आखिरी लड़ाई है जो स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी. मैं मर भी जाऊं, तो भी पीछे नहीं हटूंगा."

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Maratha Resarvation, Maratha Activist Manoj Jarange
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