महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का आंदोलन जारी है. इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने जरांगे को अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित किया. अमृता फडणवीस ने कहा कि मनोज जरांगे पाटील मेरे भाई हैं, मैं उन्हें घर पर खाना खाने के लिए आमंत्रित करती हूं. अमृता के इस बयान पर मनोज जरांगे ने भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि वह उनके निमंत्रण का सम्मान करते हैं और भाऊबीज (भाई दूज) के मौके पर बहन के घर जरूर जाएंगे, लेकिन फिलहाल वह मराठा आरक्षण की लड़ाई के लिए आंदोलन के मैदान में हैं.
'बहन को परिस्थिति समझनी चाहिए'
जरांगे ने कहा कि ताई ने खाने के लिए बुलाया है, लेकिन हम भाऊबीज के समय खाना खाने जाएंगे. अभी आंदोलन चल रहा है. भाई जब मैदान में हो तो बहन को उसे खाने के लिए नहीं बुलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संकट के समय भाई अपनी लड़ाई लड़ रहा हो तो बहन को भी उस परिस्थिति को समझना चाहिए. लड़ाई के मैदान से खाने के लिए गया तो हार माननी पड़ेगी. जरांगे ने कहा कि अगर आंदोलन के बीच वह खाने के लिए चले जाते हैं तो इसका गलत संदेश जाएगा। उनके मुताबिक लड़ाई के मैदान से जेवायला (खाने के लिए) बुलाया तो हार स्वीकार करनी पड़ेगी.
अभी समय नहीं आया है
उन्होंने कहा कि अमृता फडणवीस ने जिस प्रेम और भावना से उन्हें आमंत्रित किया है, वह उसका सम्मान करते हैं, लेकिन अभी वह समय नहीं है. उन्होंने कहा कि मराठा समाज के लिए उनकी लड़ाई जारी है और आंदोलन समाप्त होने के बाद वह अमृता फडणवीस के निमंत्रण को स्वीकार करेंगे.
13वें दिन भी जारी है अनशन
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का उपोषण जारी है और 10 सितंबर को उनके आंदोलन का 13वां दिन है. इस दौरान वह लगातार राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं और मराठा आरक्षण से जुड़े अपने मुद्दों पर सरकार से ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं. इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर कहा है कि सरकार संविधान के दायरे और न्यायालय के फैसलों के अधीन सभी विकल्पों की जांच करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी दूसरे समाज के हिस्से का आरक्षण लेकर मराठा समाज को देने के पक्ष में नहीं है और सभी समुदायों के साथ न्याय किया जाएगा.
राजनीतिक रूप से भी अहम है अमृता का बयान
अमृता फडणवीस का जरांगे को 'भाई' बताकर भोजन का निमंत्रण देना ऐसे समय आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में है. जरांगे लगातार सरकार से मराठा समाज की मांगों पर निर्णय लेने का दबाव बना रहे हैं, जबकि सरकार संविधान और न्यायिक सीमाओं के भीतर समाधान तलाशने की बात कह रही है. जरांगे ने हालांकि स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्तिगत रिश्ते और स्नेह अपनी जगह हैं, लेकिन फिलहाल उनका पूरा ध्यान आंदोलन और मराठा आरक्षण की मांग पर है. उन्होंने कहा कि भाऊबीज पर वह बहन के घर जरूर जाएंगे लेकिन अभी नहीं.
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