- ममता बनर्जी का आरोप है कि आयोग ने SIR प्रक्रिया में पक्षपातपूर्ण तरीके से 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए हैं
- ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले बिना उचित योजना और संसाधनों के SIR प्रक्रिया लागू करना अनुचित है
- उन्होंने चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखने के बावजूद कोई जवाब न मिलने की बात कही और प्रेस से स्थिति साझा की है
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं. सूत्रों के अनुसार इसके लिए तमाम विपक्षी दलों से भी संपर्क में हैं. वह कोशिश कर रही है कि जल्द ही सभी विपक्षी पार्टियों के बीच इस मसले पर एक राय बन जाए.यह घोषणा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के तीन टॉप अधिकारियों के बीच चुनाव आयोग के दिल्ली ऑफिस में हुई कहा-सुनी के एक दिन बाद हुई है. आज (मंगलवार को) इस बात की पुष्टि करते हुए, तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि ज्ञानेश कुमार का वोटर लिस्ट साफ करने का तरीका "गलत" था. हम चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर महाभियोग चलाने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि जिस तरह से वह SIR को कंडक्ट कर रहे हैं, वह गलत है और देश के हर नागरिक के वोटिंग अधिकारों पर असर डालता है.
मंगलवार सुबह ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग तृणमूल विधायकों वाली विधानसभा सीटों से वोटरों के नाम हटाने के लिए सेलेक्टिव तरीके से SIR का इस्तेमाल कर रहा है. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन चुनाव आयोग की इस एक्ससाइज पर सवाल उठाए. दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉफ्रेंस में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR पर कहा, "पहले फेज में उन्होंने (ECI) 58 लाख नाम हटा दिए, वे पीड़ितों को फॉर्म नंबर 6 भरकर अपना बचाव करने का कोई मौका भी नहीं दे रहे हैं. सिर्फ 58 लाख नाम एकतरफा हटा दिए गए, हर साल चुनाव आयोग सर्वे करता है और स्पेशल रिवीजन करता है, वह एक अलग सवाल है. ऐसे बहुत से लोग हैं जो ज़िंदा हैं लेकिन उन्हें मरा हुआ दिखाया गया है."
ममता बनर्जी बोलीं- 24 साल बाद चुनाव से ठीक पहले SIR क्यों?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मेरा पहला प्वाइंट यह है कि साल 2002 में बंगाल में SIR केस रजिस्टर और प्रोसेस किए गए थे. उसके 24 साल बाद, उसका कोई नामोनिशान नहीं है. चुनाव से ठीक पहले क्यों, क्योंकि यह फरवरी का महीना है, हो सकता है वे नोटिफिकेशन जारी कर दें. 2-3 महीनों के अंदर क्या बिना प्लानिंग, बिना मैपिंग, बिना सही ट्रेनिंग, बिना सही इंफ्रास्ट्रक्चर के SIR करना मुमकिन है?
मैंने चुनाव आयोग को 6 चिट्ठियां लिखीं, कोई जवाब नहीं आयाः ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा कि आप देख सकते हैं कि जो लोग हमारे पीछे बैठे हैं, वे सभी SIR प्रोसेस के शिकार हैं. मैं लाखों लोगों को ला सकती थी, लेकिन वे यहां 6-7 दिनों से रुके हुए हैं, क्योंकि दिल्ली प्रेस को इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है कि बंगाल में क्या हो रहा है? यह आपकी गलती नहीं है, यह आजकल सिस्टम की गलती है कि कभी-कभी असली बातें सही तरीके से सामने नहीं आतीं... सभी SIR के शिकार हैं. मैंने चुनाव आयोग को 6 चिट्ठियां लिखीं, फिर भी कोई जवाब नहीं आया.
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