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PAC चुनाव बनेगा 'असली TMC' की पहली अग्निपरीक्षा?, ममता बनर्जी और ऋतब्रत गुट विधानसभा में होंगे आमने-सामने

Real TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. एक तरफ पूर्व सीएम ममता बनर्जी का गुट हैं तो दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी का गुट है. लेकिन असली TMC पर किसका हक है इसकी अग्निपरीक्षा आने वाले PAC चुनाव में हो सकती है.

PAC चुनाव बनेगा 'असली TMC' की पहली अग्निपरीक्षा?, ममता बनर्जी और ऋतब्रत गुट विधानसभा में होंगे आमने-सामने
ममता बनर्जी और ऋतब्रत गुट आमने-सामने
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस पार्टी को लेकर खींचतान दिख रही है. एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है तो दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी का गुट है. दोनों ही खुद को असली TMC बता रहे हैं. आने वाले दिनों में यह मामला और तेज होने की संभावना है.  लेकिन असली टीएमसी को लेकर चल रही यह खींचतान बंगाल में अब विधानसभा के भीतर एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है. राज्य विधानसभा की 'लोक लेखा समिति' के अध्यक्ष पद का चुनाव संभवतः ममता बनर्जी और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों के बीच पहली औपचारिक ताकत की परीक्षा बन सकता है. 

टीएमसी में जारी है सियासी खींचतान

पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने मंगलवार को PAC समेत सदन की चार महत्वपूर्ण समितियों के गठन के लिए चुनाव प्रक्रिया की अधिसूचना जारी कर दी. जारी अधिसूचना के अनुसार विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समितिप्राक्कलन समिति और स्थानीय निधि लेखा समिति के लिए 30 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे. 1 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, 2 जुलाई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो 5 जुलाई को मतदान कराया जाएगा. विधानसभा सूत्रों के अनुसार इन समितियों के गठन की प्रक्रिया में विपक्षी खेमे के विधायक, यानी टीएमसी, कांग्रेस, सीपीआई (M) और आईएसएफ के विधायक हिस्सा लेंगे.

क्यों महत्वपूर्ण है PAC?

लोक लेखा समिति को विधानसभा की सबसे प्रभावशाली समितियों में से एक माना जाता है. यह समिति सरकारी खर्चों की निगरानी करती है और यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग नियमों और नीतियों के अनुरूप हुआ है या नहीं. समिति में अध्यक्ष समेत अधिकतम 20 सदस्य हो सकते हैं. परंपरागत रूप से PAC का अध्यक्ष विपक्ष की तरफ से नामित किया जाता रहा है, लेकिन इस बार TMC में विभाजन ने पूरी प्रक्रिया को जटिल बना दिया है. 

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'असली TMC' की दावेदारी

सूत्रों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट जो दावा करता है कि उसे टीएमसी के 80 में से करीब 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. वह PAC अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने की तैयारी कर रहा है. बागी गुट इस पद के लिए कोलकाता के पूर्व मेयर और वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम के नाम पर विचार कर रहा है. दोनों गुट समिति सदस्यता के लिए अपने-अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं. यदि नामांकन उपलब्ध सीटों से अधिक होते हैं तो मतदान होना तय हो जाएगा. ऐसे में यह चुनाव विधानसभा के भीतर दोनों गुटों के बीच सीधी शक्ति परीक्षा में बदल जाएगा. 

कौन है 'असली TMC'?

टीएमसी में संकट उस समय गहरा गया, जब पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन मिला और उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर दावा पेश किया. उन्होंने पार्टी नेतृत्व की तरफ से प्रस्तावित शोभनदेव चट्टोपाध्याय को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है. इसी बीच, सोमवार को कोलकाता में आयोजित एक विशेष बैठक में ऋतब्रत गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने की घोषणा कर दी और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को 'असली टीएमसी' का नया अध्यक्ष चुन लिया. इतना ही नहीं, गुट ने समानांतर संगठनात्मक ढांचा भी घोषित कर दिया, जिससे पार्टी के भीतर टकराव और बढ़ गया है. 

चुनाव आयोग और अदालत में भी जंग

ममता बनर्जी खेमे का दावा है कि उसने पहले ही चुनाव आयोग को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और पदाधिकारियों की सूची सौंप दी है. वहीं बागी गुट भी खुद को असली टीएमसी बताते हुए चुनाव आयोग और अन्य कानूनी मंचों पर दावा ठोक चुका है. संकट केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है. संसद में भी टीएमसी को बड़ा झटका लग चुका है. पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया NCPI में शामिल हो गए और एनडीए को समर्थन दे दिया है. राज्यसभा में भी वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय जैसे कई बड़े चेहरे पार्टी छोड़ चुके हैं. 

अब पहली बार विधानसभा में TMC बनाम TMC की स्थिति दिख रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव महज समिति गठन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि विधानसभा के भीतर किस गुट का प्रभाव अधिक है. अब तक PAC को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिलता था, लेकिन इस बार मुकाबला विपक्ष के भीतर ही है और वह भी TMC बनाम TMC. 5 जुलाई को होने वाला संभावित मतदान इस बात का सबसे स्पष्ट संकेत दे सकता है कि विधानसभा में आखिर किस गुट के पास वास्तविक समर्थन है और बंगाल की राजनीति में 'असली तृणमूल' कौन है. 

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