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जब महेंद्र सिंह टिकैत ने भरतपुर के महाराजा से कहा- एक बोरी चने भिजवा दो

किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा हुई, जहां नेताओं ने उनके राज्यसभा ऑफर ठुकराने और भरतपुर महाराजा से किसानों के लिए चना मांगने जैसे प्रेरक किस्से याद किए.

जब महेंद्र सिंह टिकैत ने भरतपुर के महाराजा से कहा- एक बोरी चने भिजवा दो

किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि के मौके पर भारतीय किसान संघठन ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. टिकैत की सादगी और स्वाभिमान के किस्से आज भी किसानों के बीच बड़े चाव से सुने जाते हैं. दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में किसान नेताओं ने टिकैत के जीवन से जुड़े कई किस्से याद किए. बीकेएस के महासचिव युद्धवीर सिंह ने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे एक बार महेंद्र टिकैत ने भरतपुर के महाराजा से एक बोरी चना भिजवाने को कहा. उन्होंने यह चने अपने साथ आए किसानों के लिए मांगे.

'साथियों से बात करके लेते थे फैसले'

सिंह ने बताया कि एक बार मुंबई के आजाद मैदान में किसानों ने बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में घेरा डाल रखा था. डीआईजी ने कहा कि टिकैत जी अब अगला कदम क्या होगा? टिकैत ने सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कहा कि जाओ उनसे पूछ लें कि अगला कदम क्या होगा. वे फैसला खुद नहीं बल्कि साथी किसानों के साथ बातचीत करके लेते थे. वो एक रोटी में दस टुकड़े करके खाते थे. 

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'भरतपुर के महाराजा से मांगे एक बोरी चना'

एक बार भरतपुर में महेंद्र सिंह टिकैत किसी आंदोलन के सिलसिले में गए थे. भरतपुर के महाराजा के महल से बुलावा आया कि महेंद्र सिंह टिकैत को महाराजा साहब ने खाने पर बुलाया है उन्होंने महाराजा से कहा कि वो अकेले खाना नहीं खाते हैं उनके साथ दो हजार किसान हैं. मैंने खा लिया तो ये लोग कहां जाएंगे. उन्होंने महाराजा से कहा कि अगर वो दो हजार लोगों को खाना नहीं खिला सकते हैं तो एक बोरी चना भिजवा दें हम किसान वही खा लेंगे.

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श्रद्धांजलि सभा में महेंद्र सिंह टिकैत के साथी रह चुके हरपाल सिंह ने कि  टिकैत ने उस वक्त में दिल्ली में दस लाख किसानों को इकट्ठा कर लिया था. राजीव गांधी ने कहा था कि आपकी मांग मान ली जाएगी. उनको राज्यसभा का भी ऑफर मिला लेकिन उन्होंने कहा कि राज्यसभा से बड़ा किसानों के लिए काम करना है. श्रद्धांजलि सभा में बड़ी तादात में किसान इकट्ठा हुए महेंद्र सिंह टिकैत के साथी ब्रजेंद्र राठी ने इस मौक़े पर कहा कि उस वक्त किसानों की आवाज को उठाने के लिए उनके साथियों ने गोलियां और लाठी तक खाई. राजकुमार भाटी ने महेंद्र सिंह टिकैत के बारे में कहा कि वो आजाद भारत के पहले ऐसे किसानों के नेता थे जो खुद किसान थे. आज किसानों की बात करने वाले लोगों को पता ही नहीं कि एक एकड़ में गेंहू के कितना किलो बीज पड़ता है.

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