लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने तीन संरक्षित क्षेत्रों की प्रस्तावित सीमाओं से जुड़ी रिपोर्ट को खारिज कर दिया है. उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय समुदायों के अधिकारों और दावों का निपटारा दो महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है. ये मामला हेमिस नेशनल पार्क, हाई अल्टीट्यूड कोल्ड डेजर्ट (चांगथांग) वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी और काराकोरम (नुब्रा-श्योक) वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से जुड़ा है.
शुक्रवार को सक्सेना की अध्यक्षता में हुई स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (SBWL) की बैठक में संबंधित डिप्टी कमिश्नरों और सेटलमेंट अधिकारियों को सार्वजनिक सुनवाई फिर से शुरू करने और दो महीने में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया. बोर्ड तीनों संरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं को अंतिम रूप देने से जुड़ी एक उप-समिति की रिपोर्ट पर विचार कर रहा था. इसी दौरान रिपोर्ट में कई खामियां सामने आईं.
लद्दाख प्रशासन के मुताबिक, वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत प्रस्तावित संरक्षित क्षेत्रों में लोगों और समुदायों के अधिकारों के निपटारे की जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी. सक्सेना ने कहा कि सीमाओं का निर्धारण एक “टेबल-टॉप एक्सरसाइज” के जरिए किया गया और कानून में तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ.
प्रशासन ने कहा कि यह प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी और इससे प्रभावित समुदायों के हितों पर असर पड़ सकता था. रिपोर्ट को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना भी थी. बोर्ड ने यह भी पाया कि 1987 में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से जारी प्रारंभिक अधिसूचना में संरक्षित क्षेत्रों की सीमाएं जमीन पर सही तरीके से नहीं दिखाई गई थीं.
स्थानीय समुदायों का कहना है कि इन इलाकों में लंबे समय से बस्तियां और मानव आबादी मौजूद हैं और इन्हें संरक्षित क्षेत्रों की सीमा से बाहर रखा जाना चाहिए. प्रशासन के मुताबिक, पहले की उप-समिति की कवायद में इन इलाकों को भी शामिल किया गया था. सक्सेना ने स्थानीय लोगों से जमीन से जुड़े दावों और दस्तावेजों के साथ सामने आने को कहा है. इनमें पारंपरिक अधिकार और चरागाह भूमि से जुड़े दावे भी शामिल हैं.
संरक्षित क्षेत्रों की सीमा पर सुरक्षा का सवाल
बोर्ड ने कहा कि उप-समिति की रिपोर्ट में शामिल कई इलाके रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं. उसके मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करते समय जरूरी रक्षा संबंधी पहलुओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया.
सक्सेना ने यह भी कहा कि संरक्षित क्षेत्रों की सीमा तय करते समय सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शों में दिखाई गई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया. बोर्ड के मुताबिक, किसी भी संरक्षित क्षेत्र की सीमा तय करने के लिए यह जरूरी है. उपराज्यपाल ने उप-समिति की रिपोर्ट खारिज करते हुए स्थानीय समुदायों के अधिकारों और दावों के निपटारे के लिए नई प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है.
इसी बैठक में स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने 23 परियोजनाओं को भी मंजूरी दी और उन्हें नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा. इनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों में पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा से जुड़ी परियोजनाएं और काराकोरम तथा चांगथांग क्षेत्रों की अन्य जरूरी परियोजनाएं शामिल हैं.
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