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क्या अब हर 6 महीने में करानी होगी किडनी की जांच? 20+ उम्र वालों के लिए संसदीय समिति की सिफारिश

देश में बढ़ते क्रोनिक किडनी डिजीज के मामलों को देखते हुए संसद की स्थायी समिति ने महत्वपूर्ण सिफारिशें की

क्या अब हर 6 महीने में करानी होगी किडनी की जांच? 20+ उम्र वालों के लिए संसदीय समिति की सिफारिश

देश में किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों को देखते हुए संसद की एक स्थायी समिति ने बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग और जांच व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की है. समिति ने यह सुझाव दिया है कि 20 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी लोगों का हर 6 महीने में किडनी फंक्शन टेस्ट कराया जाए, जिससे किडनी रोग के अधिक जोखिम वाले लोगों की सालाना जांच अनिवार्य की जाए.

सपा सांसद राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी 177वीं रिपोर्ट में क्रोनिक किडनी डिजीज की रोकथाम, पहचान, उपचार और प्रबंधन को लेकर 66 सुझाव दिए हैं. समिति का मानना है कि वर्तमान स्क्रीनिंग व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यह काफी हद तक लोगों के स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने पर निर्भर करती है.

BPL परिवारों के लिए KFT मुफ्त कराने की सलाह

रिपोर्ट में यह कहा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को साल में दो बार KFT मुफ्त उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जबकि अन्य लोगों को यह सुविधा बेहद कम लागत पर मिले. समिति ने यह भी कहा कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, 60 वर्ष से अधिक आयु, मोटापा, तंबाकू सेवन, किडनी रोग का इतिहास और बार-बार यूरिन संक्रमण जैसी स्थितियों वाले लोगों को प्राथमिकता के आधार पर नियमित जांच में शामिल किया जाना चाहिए.

समिति ने सुझाया कि जोखिम वाले लोगों की स्क्रीनिंग में eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) और यूरिन एल्ब्यूमिन/प्रोटीन टेस्ट को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. इसके साथ ही मरीजों के लिए सही रेफरल और निरंतर फॉलो-अप की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए.

मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का भी सुझाव

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश में CKD के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वर्तमान में भारत में करीब 13.24 प्रतिशत आबादी किसी न किसी स्तर पर क्रोनिक किडनी रोग से प्रभावित है. बीमारी की पहचान देर से होने के कारण कई मरीजों को डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है. समिति ने सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर CKD स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल लागू करने, सरकारी और निजी लैब में हर सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट के साथ स्वतः eGFR रिपोर्ट देने तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए जागरूकता अभियान चलाने की भी सिफारिश की है. इसके अलावा ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पेरिटोनियल डायलिसिस को बढ़ावा देने, ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को अधिक समय तक स्वास्थ्य कवरेज देने और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है.

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