केरल विधानसभा चुनाव के लिए आए एग्जिट पोल में राज्य में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के की वापसी के संकेत मिल रहे हैं. यह गठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व में बना है. इसका मतलब होगा कि केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार बनेगी. मुख्यमंत्री कांग्रेस का होगा. लेकिन इससे पहले ही चर्चा इस बात की हो रही है कि कांग्रेस से मुख्यमंत्री कौन होगा. विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस सांसद शशी थरूर के नाम की चर्चा है. केरल में कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने मुख्यमंत्री पद के लिए सतीशन का समर्थन किया है.इससे राज्य में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है.
कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दावेदार कितने हैं
एक्सिस माय इंडिया ने एनडीटीवी के लिए एग्जिट पोल किया. इसमें लोगों से मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पसंदीदा नेता के नाम पर भी सवाल किया गया. इसमें वीडी सतीशन को 21 फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री पद पर अपनी पसंद बताया. वहीं रमेश चेन्नीथला को आठ फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया. इन दोनों के अलावा केसी वेनुगोपाल को तीन फीसदी और शशि थरूर को एक फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पसंद बताया. इससे पता चला कि यूडीएफ में सतीशन सीएम पद के लिए लोगों की पहली पसंद हैं.
यह नतीजा देखर यूडीएफ में शामिल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी सतीशन के नाम की पैरवी कर दी. एग्जिट पोल आने के बाद आईयूएमएल के केरल प्रदेश प्रमुख सादिक अली शिहाब थंगल ने मलप्पुरम में पत्राकरों से कहा कि यह जनता की भावना को दिखाता है. लोग शायद इसी तरह अपनी राय दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व को लेना है, लेकिन उन्हें जनता की राय का भी ध्यान रखना होगा. इसके साथ ही उन्होंने नई सरकार में अपनी पार्टी के लिए भी उचित जगह की मांग कर दी. उन्होंने उम्मीद जताई कि 140 सदस्यों वाली विधानसभा में उनकी पार्टी 20-22 सीटें जीत सकती है.केरल में उम्मीद जताई जा रही है कि आईयूएमएल नई सरकार में अपने लिए उपमुख्यमंत्री पद की भी मांग कर सकती है. हालांकि थंगल ने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया था.

शशि थरूर कितने लोकप्रिय हैं
केरल की कांग्रेस में सतीशन, चेन्नीथल और वेणुगोपाल बड़े नेता माने जाते हैं.भारतीय विदेश सेवा से राजनीति में आई शशि थरूर तिरुवंतपुर सीट से 2009 से लगातार लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं. वह भी अपने आप को सीएम पद का दावेदार मानते हैं. कई बार वो केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ कर कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर देते हैं. राजनीति के जानकार इसे केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने की रणनीति बताते हैं. वो पिछले कुछ समय से जिस तरह से शांत हैं, उससे लगता है कि कांग्रेस नेतृ्त्व उन्हें मना पाने में सफल हुआ है. लेकिन एग्जिट पोल में जितने लोग उन्हें सीएम पद पर देखना चाहते हैं, वह संख्या उनकी लोकप्रियता का परिचय देती है.
वीडी सतीशन विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं. वो माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के खिलाफ लगातार सड़क पर संघर्ष करते रहे हैं. सड़क पर होने की वजह से वो जनता को नजर आते हैं. इसलिए लोग भी उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. यही बात एग्जिट में नजर भी आ रही है. वहीं वेणुगोपाल दिल्ली में रहकर केरल की राजनीति करते हैं. उनके पास महासचिव (संगठन) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. इस बार उम्मीदवारों का चयन कांग्रेस हाईकमान ने किया है. लेकिन इसमें वेणुगोपाल का बड़ा हाथ रहा है. ऐसे में वो अपने लोगों को बड़ी संख्या में टिकट दिला पाने में कामयाब रहे हैं. ये लोग अगर चुनाव जीत कर आते हैं तो वेणुगोपाल की दावेदारी बढ़ जाएगी. वो कांग्रेस आलाकमान के करीब भी हैं.
कौन लेगा सीएम पद पर फैसला
केरल में सीएम पद के एक और दावेदार रमेश चेन्नीथला भी हैं. चेन्नीथला को कांग्रेस की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है. ऐसा इसलिए कि वो उस समय सांसद चुने गए थे, जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. वो चार बार सांसद और पांच बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने कांग्रेस में राजीव, सोनिया और राहुल का दौर देखा है, इसलिए उन्हें गांधी परिवार का करीबी माना जाता है.
केरल में यूडीएफ के मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर अंतिम फैसला कांग्रेस अलाकमान को ही लेना है और वह फैसला अभी तक आया नहीं है. इसलिए हमें अभी इंतजार करना होगा कि कांग्रेस अलाकमान क्या फैसला करता है.
केरलम में विधानसभा की 140 सीटें हैं. राज्य में विधानसभा चुनाव का मतदान एक चरण में नौ अप्रैल को कराया गया था. केरलम में साधारण बहुमत हासिल करने के लिए 71 सीटें जीतनी जरूरी हैं. एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल में सीपीएम के नेतृ्त्व वाले एलडीएफ को 49-62 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को 78-90 सीटें जीतते हुए दिखाया गया है. राज्य में भी एलडीएफ की सरकार है. केरल में मतगणना चार मई को कराई जाएगी.
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