तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में DMK के नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. उन्होंने याचिका दाखिल कर इस मामले में सीएम थलपति विजय और उनके मंत्रियों की बयानबाजी रोकने की मांग की है. साथ ही डीएमके नेताओं ने इस मामले में उन्हें भी पक्षकार बनाने की मांग की है. 27 सितंबर 2025 को TVK की एक जनसभा के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी. इस हादसे 41 लोगों की मौत हुई थी जबकि 142 लोग घायल हुए थे.
DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है. उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुन और मामले के अन्य आरोपियों को चल रही CBI जांच पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए.
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सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इस मामले की जांच CBI को सौंप दी थी. जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली कमेटी कर रही है. आर.एस. भारती ने अपनी याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपी CBI जांच पूरी होने तक मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी न करें. 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन द्वारा दिया गया बयान जांच को प्रभावित करने की कोशिश माना जाना चाहिए. आरोप है कि उन्होंने कहा था कि करूर घटना को लेकर “हिसाब बराबर करना है” और पूर्व DMK सरकार पर लोगों की मौत का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि आरोपियों द्वारा इस तरह के बयान जांच और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं.
याचिका में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री विजय के 10 जुलाई के आसपास करूर जाकर मृतकों और घायलों के परिवारों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य लाभ देने का कार्यक्रम है. DMK ने स्पष्ट किया कि उसे पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता देने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ये परिवार CBI जांच में महत्वपूर्ण गवाह भी हैं. ऐसे में आरोपियों या राजनीतिक कार्यपालिका के सीधे संपर्क से जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं.
याचिका में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 में, जब मामला अदालत में लंबित था, तब विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी. आर.एस. भारती ने अदालत से मांग की है कि मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सी.टी.आर. निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए. पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सुरक्षा उपायों और CBI को जानकारी देने के बाद ही दी जाए. CBI को मंत्री आधव अर्जुन के 2 जुलाई के बयान की जांच कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए.
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