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'मेकेदातु प्रोजेक्ट' को लेकर भिड़े कर्नाटक-तमिलनाडु... CM विजय ने अब PM मोदी से लगाई गुहार

कर्नाटक सरकार की मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु में ठन गई है. तमिलनाडु के सीएम विजय ने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है.

'मेकेदातु प्रोजेक्ट' को लेकर भिड़े कर्नाटक-तमिलनाडु... CM विजय ने अब PM मोदी से लगाई गुहार
तमिलनाडु के सीएम विजय और पीएम मोदी. (फाइल फोटो)
IANS
  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी से मेकेदातु बांध प्रस्ताव को खारिज करने का आग्रह किया है
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कर्नाटक को बांध बनाने के लिए तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की सहमति जरूरी है
  • विजय का तर्क है कि मेकेदातु बांध कावेरी जल विवाद संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होगा
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चेन्नई:

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर उनसे कर्नाटक के मेकेदातु में बांध बनाने के प्रस्ताव को खारिज करने का आग्रह किया है. मेकेदातु वह इलाका है जो दोनों राज्यों की सीमा के करीब है. विजय ने यह चिट्ठी तब लिखी है, जब कर्नाटक सरकार बांध बनाने के लिए भूमि पूजन करने वाली है. बताया जा रहा है कि विजय जल्द ही दिल्ली का दौरा भी करेंगे.

कावेरी जल को लेकर दशकों से चले आ रहे विवाद के बीच, कर्नाटक रामनगर जिले के कनकपुरा के पास मेकेदातु में एक बांध बनाने की योजना बना रहा है. मेकेदातु का मतलब है- बकरी का रास्ता. विजय का तर्क है कि बांध बनाना कावेरी वाटर ट्रिब्यूनल के उस फैसले के खिलाफ होगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है.

2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, कावेरी नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित राज्य, नदी के निचले हिस्से में स्थित राज्यों की सहमति के बिना कोई भी बांध या जलाशय नहीं बना सकते. इस मामले में, मेकेदातु बांध बनाने के लिए कर्नाटक को तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की सहमति की जरूरत होगी.

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विजय ने PM मोदी से क्या अपील की?

विजय ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'मेकेदातु बांध उन परियोजनाओं की सूची में शामिल नहीं है जिन्हें ट्रिब्यूनल ने अनुमति दी है.' 

चिट्ठी में आगे कहा गया है, 'अतिरिक्त पानी का इस्तेमाल या कोई बड़ा जलाशन बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि कावेरी बेसिन पहले ही डेफिसिट बेसिन घोषित किया जा चुका है. साथ ही 50% निर्भरता के आधार पर पानी का बंटवारा संबंधित राज्यों के बीच पहले ही किया जा चुका है. इसलिए कर्नाटक का एक नया जलाशय बनाने का प्रस्ताव रखना, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का साफ तौर पर उल्लंघन माना जाएगा.'

विजय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को कर्नाटक सरकार को यह सलाह देनी चाहिए कि वे नदी के निचले हिस्से में स्थित राज्यों की सहमति के बिना कोई भी नई परियोजना शुरू न करें और न ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करें.

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मेकेदातु को लेकर तनातनी!

मेकेदातु बांध को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु में तनातनी होने लगी है. एक दिन पहले ही विजय ने अपने अधिकारियों को मेकेदातु बांध को लेकर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

पिछले हफ्ते, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा था कि मेकेदातु प्रोजेक्ट के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जल्द ही केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी और इसकी मंजूरी मिलने के बाद शिलान्यास समारोह होगा.

उन्होंने कहा था, 'तमिलनाडु को 177 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश है. हम आने वाले दिनों में इस समस्या को हल करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि तमिलनाडु को मेकेदातु प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताने का कोई हक नहीं है और इस पर फैसला केंद्रीय जल आयोग को ही लेना होगा.'

शिवकुमार की इन टिप्पणियों से काफी हंगामा मच गया है. विपक्षी पार्टी डीएमके ने आरोप लगाया है कि शिवकुमार ने 'अहंकारी रवैया' दिखाया है, क्योंकि उनका दावा था कि तमिलनाडु को इस परियोजना पर आपत्ति जताने का कोई अधिकार नहीं है. डीएमके ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री विजय को शुरुआती फेज में ही इस परियोजना को फेल कर देना चाहिए.

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