- कर्नाटक में कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर विवाद
- कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाकर नेतृत्व विवाद को सुलझाने के लिए बैठक आयोजित की है
- CM सिद्धारमैया ने कहा है कि वे हाईकमान के फैसले को मानेंगे, उनकी उम्र चुनावों के लिए चुनौती हो सकती है
केरल में सरकार बनने के बाद सीएम चुनने में खासी मशक्कत करने के बाद कांग्रेस ने चैन की सांस ली ही थी कि अब कर्नाटक में भी नेतृत्व को लेकर खटपट शुरू हो गई है. सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. इसका पता कांग्रेस आलाकमान को भी लग गया है. इसी को देखते हुए दोनों को दिल्ली बुलाया गया है और आज दोनों नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करेंगे. सूत्रों ने बताया कि सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार पहले अलग-अलग और फिर साथ में मुलाकात होगी.
दिल्ली में होगा कर्नाटक का समाधान
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मची खींचतान पर आज दिल्ली के इंदिरा भवन में बैठक होगी. सुबह 11 बजे कांग्रेस के इस मुख्यालय में राहुल गांधी और खरगे सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से मुलाकात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं से पहले अलग-अलग और फिर साथ में मुलाकात होगी.
सीएम डिप्टी सीएम के बयान भी सामने आए
77 वर्षीय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा,“मुझे दिल्ली बुलाया गया है, लेकिन चर्चा का विषय मुझे नहीं पता.” उन्होंने बताया कि उनकी मंगलवार सुबह 11 बजे बैठक निर्धारित है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अटकलें तो चलती रहती हैं. कांग्रेस नेता और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को इस दिल्ली बैठक के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया गया था. उन्होंने पहले कहा था, “अगर हाईकमान बुलाएगा तो दिल्ली जाऊंगा.मुख्यमंत्री बदलने पर टिप्पणी करना मेरा काम नहीं है.” हालांकि, बाद में वह भी देर शाम दिल्ली पहुंच गए, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई.इसी साल जनवरी में सिद्धारमैया ने कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा था,उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ा था.
कब से शुरू हुआ विवाद?
यह नेतृत्व विवाद पिछले साल नवंबर में शुरू हुआ था, जब कांग्रेस सरकार ने राज्य में ढाई साल पूरे किए थे. डीके शिवकुमार गुट ने 2023 में सरकार बनने के वक्त हुए पावर‑शेयरिंग फॉर्मूले की याद दिलाई जिसमें कथित तौर पर नेतृत्व बदलाव को लेकर समझौता हुआ था. उस समय पार्टी हाईकमान ने दोनों गुटों के साथ कई बैठकें की थीं और ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग' जैसे कार्यक्रमों के जरिए एकता का संदेश दिया गया था.
सूत्रों के अनुसार,कांग्रेस नेतृत्व ने पहले संकेत दिए थे कि केरल और तमिलनाडु चुनावों के बाद कर्नाटक के नेतृत्व विवाद पर ध्यान दिया जाएगा. पिछले हफ्ते डीके शिवकुमार के जन्मदिन पर उनके समर्थकों द्वारा ‘Next CM' के पोस्टर लगाए गए और इसी संदेश के साथ केक भी लाए गए जिससे सियासी हलचल फिर तेज हो गई. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कहा है कि वे हाईकमान के किसी भी फैसले को मानेंगे. हालांकि उनकी उम्र (77 साल) अगले चुनावों के लिहाज से एक चुनौती मानी जा रही है, लेकिन उनकी लोकप्रियता और खासकर दलित और पिछड़े वर्गों में मजबूत पकड़ उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाए रखती है.
सामाजिक संतुलन का मुद्दा
136 कांग्रेस विधायकों में से 100 से ज्यादा का समर्थन सिद्धारमैया के पास है.यह उन्हें नेतृत्व की दौड़ में मजबूत स्थिति देता है. सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में जारी नेतृत्व विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान के सामने तीन प्रमुख विकल्प हैं:
विकल्प 1: सिद्धारमैया को जारी रखना
पहला विकल्प यह है कि सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने दिया जाए,साथ ही उन्हें लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार
और मंत्रिमंडल में फेरबदल करने की अनुमति दी जाए. सिद्धारमैया की सरकार और पार्टी में पकड़ मजबूत होगी.डीके शिवकुमार को संकेत जाएगा कि उन्हें CM बनने के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है.
विकल्प 2: शिवकुमार को मजबूत करना, सिद्धारमैया को राष्ट्रीय भूमिका
दूसरा विकल्प यह है कि डीके शिवकुमार को राज्य में अधिक ताकत दी जाए. उनके पास ज्यादा महत्वपूर्ण विभाग (portfolios) दिए जाएं. उनके करीबी नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारियां मिलें. इसके साथ ही सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाकर राष्ट्रीय भूमिका (national role) दी जा सकती है. उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) बनाया जा सकता है. इससे राज्य में संतुलन बनेगा और केंद्र में उनका अनुभव इस्तेमाल होगा
विकल्प 3: पावर‑शेयरिंग फॉर्मूले के तहत CM बदलना
तीसरा और सबसे बड़ा विकल्प ये कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धारमैया को पद छोड़ने के लिए तैयार करे और डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए. यह कदम 2023 के कथित पावर‑शेयरिंग समझौते के अनुरूप होगा. इससे शिवकुमार गुट संतुष्ट होगा लेकिन पार्टी के भीतर नए समीकरण बन सकते हैं.
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