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This Article is From Nov 03, 2011

जोशी बोले, नीलामी का विरोध नहीं किया

जोशी ने कहा, मैं अपने पत्र पर कायम हूं। मैंने तब मीडिया में आयी खबरों में जताई गई आशंकाओं के संदर्भ में प्रधानमंत्री को यह पत्र लिखा था।'
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नई दिल्ली: वर्ष 2007 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने एक पत्र के विवादों में आने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को कहा कि वह नीलामी के विरोध में नहीं थे और उन्होंने सरकारी दूरसंचार कंपनियों एमटीएनएल और बीएसएनएल के संदर्भ में अपनी बात कही थी। कांग्रेस ने बुधवार को इस पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि जब जोशी ने स्पेक्ट्रम की नीलामी के खिलाफ बात कही थी तो उनकी पार्टी इस मामले में विपरीत रुख क्यों अपना रही है। अपने इस पत्र का बचाव करते हुए जोशी ने कहा, मैं अपने पत्र पर कायम हूं। मैंने तब मीडिया में आयी खबरों में जताई गई आशंकाओं के संदर्भ में प्रधानमंत्री को यह पत्र लिखा था। पत्र में मैंने स्पेक्ट्रम की नीलामी का जिक्र एमटीएनएल और बीएसएनएल के हितों के संदर्भ में किया था। जोशी ने अपने पत्र के अंश पढ़ते हुए कहा, कुछ ऑपरेटरों ने सुझाव दिया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी होनी चाहिए। इसके ये मायने हैं कि इससे जमाखोरी और सांठगांठ हो सकती है जो एमटीएनएल और बीएसएनएल के लिए नुकसानदायक होगी। उन्होंने कहा, पत्र में मैंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और वास्तविक भागीदारों के हितों की रक्षा की जाये। मैंने कहा था कि समान अवसर देती लाइसेंसिंग की नीति के जरिये संभवत: ऐसा किया जा सकता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इन वाक्यों से यह आशय कतई नहीं निकाला जा सकता कि वह स्पेक्ट्रम की नीलामी के खिलाफ थे। उन्होंने सिर्फ एमटीएनएल और बीएसएनएल के हितों की रक्षा करने और निजी कंपनियों की सांठगांठ रोकने के संदर्भ में यह बात कही थी। जोशी ने कहा, इस पत्र को लेकर कांग्रेस बेवजह का विवाद खड़ा कर रही है। मेरे पत्र के कारण 2-जी घोटाला नहीं हुआ। सरकार की गलतियों के कारण यह घोटाला हुआ। जोशी ने कहा कि उन्होंने पत्र में कहा था कि समान अवसर देती ऐसी लाइसेंसिंग नीति सुनिश्चित करायी जानी चाहिए जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त हो, सामाजिक दायित्वों को पूरा किये बिना इस्तेमाल होने वाले अत्यधिक स्पेक्ट्रम का पता लग सके, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के हितों की रक्षा हो और नयी कंपनियों को मौका मिले। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने दो दिसंबर 2007 को प्रधानमंत्री को यह पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था, मीडिया ने हाल ही में खबर दी है कि दूरसंचार क्षेत्र में सक्रिय कुछ शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बीएसएनएल और एमटीएनएल को सरकार द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन करने के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। पत्र में जोशी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में दूरसंचार के क्षेत्र में विकास नहीं हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को इस सामाजिक दायित्व को पूरा करने का उद्देश्य दिया गया है, जबकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां सिर्फ शहरी इलाकों और उच्च मुनाफे वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। जोशी के अनुसार, मैंने पत्र में मीडिया में आयी खबरों में संदर्भ में कहा था कि दूरसंचार विभाग की नयी नीति की घोषणा के बाद निजी ऑपरेटर एमटीएनएल और बीएसएनएल को स्पेक्ट्रम से वंचित रखकर उनके विकास को अवरूद्ध करना चाहते हैं। जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का जवाब उन्हें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा ने सात मार्च 2008 को भेजा था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि किसी भी ऑपरेटर को उसकी योग्यता से अधिक स्पेक्ट्रम आवंटन नहीं किया गया है।

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