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जामिया में लड़का-लड़की साथ दिखे तो करा देंगे 'निकाह'? जानें क्या है इस Viral letter का पूरा सच

इस मामले पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (PRO) प्रोफेसर साइमा सईद ने साफ कर दिया है कि यह सर्कुलर पूरी तरह से फर्जी (Fake) है. यूनिवर्सिटी ने ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया है.

जामिया में लड़का-लड़की साथ दिखे तो करा देंगे 'निकाह'? जानें क्या है इस Viral letter का पूरा सच
भारत के कानून के हिसाब से कोई भी यूनिवर्सिटी जबरन किसी की शादी नहीं करा सकती.

Jamia Millia Islamia Viral letter : आजकल दिल्ली की मशहूर जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी का एक कथित सर्कुलर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. इस लेटर में कुछ ऐसी बातें लिखी हैं जिसे पढ़कर हर कोई सन्न है. दरअसल, वायरल सर्कुलर में दावा किया जा रहा है कि अगर यूनिवर्सिटी कैंपस में कोई लड़का-लड़की साथ नजर आए, तो उनका निकाह करा दिया जाएगा.

लेकिन क्या वाकई जामिया जैसा प्रतिष्ठित संस्थान ऐसा कोई नियम बना सकता है? चलिए, जानते हैं इसके पीछे की अस कहानी क्या है.

वायरल लेटर में क्या है दावा?

सोशल मीडिया पर जो लेटर शेयर किया जा रहा है, वह देखने में बिल्कुल ऑफिशियल (Official) लगता है. इसमें जामिया के रजिस्ट्रार ऑफिस का हवाला भी दिया गया है. लेटर में लिखा है कि रमजान के पाक महीने के दौरान कैंपस में लड़का-लड़की का एक साथ खड़ा होना या बैठना सख्त मना है. इतना ही नहीं, लेटर में आगे लिखा है कि अगर कोई कपल साथ पाया गया, तो यूनिवर्सिटी प्रशासन तुरंत उनका 'निकाह' करा देगा. 

हद तो तब हो गई जब इसमें नीचे एक नोट लिखा गया कि नियम तोड़ने वाले कपल को अपनी वलीमा का इंतजाम खुद करना होगा.

कैसे खुली इस 'फेक' लेटर की पोल?

जब लेटर को ध्यान से देखा गया तो पाया गया कि ऊपरी हिस्से में डेट 20-02-2026 लिखी है, जबकि नीचे की तरफ डिप्टी रजिस्ट्रार के साइन के साथ 20-01-2026 की डेट है. एक ही कागज पर दो अलग-अलग महीने होना नामुमकिन है.

दूसरी बात किसी भी यूनिवर्सिटी का ऑपिशियल ऑर्डर की लैंग्वेज बहुत सीरियस होती है, लेकिन इस लेटर में 'वलीमा दावत' जैसी बातें लिखी हैं जो सिर्फ एक प्रैंक लग रहा है.

तीसरी बात भारत के कानून के हिसाब से कोई भी यूनिवर्सिटी जबरन किसी की शादी नहीं करा सकती.

यूनिवर्सिटी  ने क्या कहा?

इस मामले पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (PRO) प्रोफेसर साइमा सईद ने साफ कर दिया है कि यह सर्कुलर पूरी तरह से फेक है. यूनिवर्सिटी ने ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया है. छात्रों और आम लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल ऑफिशियल वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें.

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