एक तस्वीर, दो ऐतिहासिक पड़ाव और एक ही रेल पटरी. हरियाणा के जींद जंक्शन की ये सिर्फ एक तस्वीर भर नहीं, बल्कि भारत के रेल इतिहास का जीवंत दस्तावेज है.
साल था 1916, जब ईस्ट इंडिया रेलवे ने जींद–पानीपत रेल लाइन तैयार करवाई. ट्रैक बिछाने के बाद उस समय के अंग्रेज इंजीनियरों और रेल कर्मचारियों ने इसी जगह खड़े होकर ग्रुप फोटो खिंचवाई थी. वो तस्वीर उनके मेहनत और उस दौर की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि का जश्न थी. उस समय किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि 110 साल बाद यही पटरी देश के भविष्य की ट्रेन चलाएगी.

2026: इसी ट्रैक पर दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन
अब 2026 में जींद यही ट्रैक एक बार फिर इतिहास बनाने जा रहा है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद से सोनीपत तक चलने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. इसमें डीजल की जगह हाइड्रोजन फ्यूल से बिजली बनती है और धुएं की जगह सिर्फ पानी निकलता है.
विरासत से नवाचार तक का सफर
इतिहास हमें यह सिखाता है कि 'मजबूत बुनियादी ढांचा दूरदृष्टि से बनता है.' अंग्रेजों ने अपने समय में रेल नेटवर्क का विस्तार किया, जबकि आज स्वतंत्र भारत उस विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ा रहा है.
मोदी सरकार में रेलवे के आधुनिकीकरण, विद्युतीकरण और नई तकनीकों पर जो जोर दिया जा रहा है, हाइड्रोजन ट्रेन उसी दिशा का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
जींद जंक्शन हरियाणा का ऐसा महत्वपूर्ण रेल केंद्र है, जहां से देश के अनेक हिस्सों के लिए रेल कनेक्टिविटी है. अब समय है कि यह जंक्शन केवल इतिहास के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक के लिए भी पहचाना जाए.

Photo Credit: IANS
क्यों खास है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर चलने वाली भारत की ये पहली ट्रेन कई मायनों में खास है. जिंद-सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी है. इस रास्ते पर यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी. इस ट्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है.
आज के समय में दुनियाभर में इस तकनीक पर चलने वालीं ज्यादातर ट्रेनों में सिर्फ दो या तीन कोच होते हैं और इन्हें आमतौर पर छोटी दूरी के लिए बनाया गया है. जबकि, भारत की ट्रेन में 10 कोच हैं और इसमें एक बार में 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं.
इस ट्रेन में सुरक्षा के भी बेहद पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इससे हाइड्रोजन लीक होने, गर्मी होने, आग लगने या धुआं निकलने का पता तुरंत लगाया जा सकता है. ट्रेन में ऐसे उपकरण लगे हैं जो लगातार हाइड्रोजन रिसाव, असामान्य गर्मी, आग की लपटों या धुएं पर नजर रखते हैं, इसलिए कोई भी समस्या कुछ ही सेकंड में पकड़ में आ जाती है.
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