- झारखंड की राजनीति में मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन से एक दुखद संयोग बन गया है.
- पिछले साढ़े तीन सालों में शिक्षा विभाग से जुडे़ 3 मंत्रियों का निधन हो गया है.
- सुदिव्य सोनू से पहले जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन का असमय निधन हो गया था.
झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य सोनू के असमय निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है. उनका आज गिरिडीह में अंतिम संस्कार होगा. खास बात यह है कि सुदिव्य सोनू शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उनके निधन से झारखंड की राजनीति में पिछले साढ़े तीन वर्षों में एक ऐसा दुखद संयोग सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति से लेकर शिक्षा जगत तक को झकझोर दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले साढ़े 3 सालों में 3 जिन तीन मंत्रियों ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, उनका असमय निधन हुआ है. इसलिए इसे राज्य की राजनीति में एक दुखद संयोग माना जा रहा है.
झारखंड की राजनीति का दुखद संयोग
झारखंड में 6 अप्रैल 2023 को तत्कालीन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री जगरनाथ महतो का निधन हुआ, जिसके बाद मंत्री रामदास सोरेन को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई. लेकिन करीब दो साल बाद 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया. वहीं अब 6 सितंबर 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन ने इस सिलसिले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. जिसकी चर्चा राज्य की राजनीति में भी हो रही है.

जगरनाथ महतो का 2023 में हुआ था निधन
झारखंड की राजनीति में जगरनाथ महतो को उनके जुझारू तेवर और बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता था. समर्थक उन्हें 'टाइगर जगरनाथ' के नाम से बुलाते थे. कोरोना संक्रमण के बाद उनकी तबीयत लगातार खराब रही. नवंबर 2020 में उनके फेफड़े का प्रत्यारोपण भी हुआ था. स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए चेन्नई ले जाया गया. जहां 6 अप्रैल 2023 को उनका निधन हो गया था. उनके निधन के बाद झारखंड सरकार ने दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत तमाम नेताओं ने उनके निधन को राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया था.
मंत्री रामदास सोरेन का 2025 में निधन
जगरनाथ महतो के निधन के करीब दो साल बाद झारखंड को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा. तत्कालीन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रामदास सोरेन 2 अगस्त 2025 को अपने आवास के बाथरूम में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एयरलिफ्ट किया गया. दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया. वे 62 साल के थे. ग्राम प्रधान के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले रामदास सोरेन ने लंबा राजनीतिक संघर्ष तय किया और राज्य सरकार में मंत्री पद तक पहुंचे. उनके निधन के बाद राज्य में शोक की लहर दौड़ गई थी.

सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन
अब इस दुखद कड़ी में तीसरा नाम सुदिव्य कुमार सोनू का जुड़ गया है. गिरिडीह सदर से विधायक और झारखंड सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को आकस्मिक निधन हो गया. रिपोर्टों के मुताबिक, तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. शुरुआती जानकारी में कार्डियक अरेस्ट को उनकी मौत की वजह बताया गया है.सुदिव्य कुमार सोनू के पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अलावा नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी. ऐसे में उनका निधन झारखंड सरकार के साथ-साथ शिक्षा, शहरी विकास और युवा मामलों के लिए भी बड़ा झटका है.
तीन मंत्री, एक जैसा दुखद संयोग
जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक पृष्ठभूमि और उनके राजनीतिक सफर अलग-अलग रहे. लेकिन तीनों का नाम अब एक ऐसे संयोग से जुड़ गया है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी. शिक्षा विभाग से जुड़ी जिम्मेदारी संभालते हुए पद पर रहते असमय निधन हो गया. लगातार तीन मंत्रियों की पद पर रहते मौत ने इस घटनाक्रम को असाधारण और बेहद पीड़ादायक जरूर बना दिया है. शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्रियों के सामने हर दौर में बड़ी चुनौतियां रही हैं. सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, शिक्षकों की उपलब्धता, उच्च शिक्षा का विस्तार, तकनीकी संस्थानों को मजबूत करना और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है.

इन तीनों मंत्रियों की असमय विदाई के साथ उनके राजनीतिक लक्ष्य और कई जिम्मेदारियां भी अधूरी रह गईं. हर बार सरकार को न सिर्फ एक मंत्री खोना पड़ा, बल्कि उनके परिवार, समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों को भी गहरे सदमे से गुजरना पड़ा.
झारखंड की राजनीति में दर्ज हुआ दर्दनाक अध्याय
6 अप्रैल 2023 को जगरनाथ महतो के निधन से शुरू हुई यह पीड़ादायक कड़ी 15 अगस्त 2025 को रामदास सोरेन के निधन के साथ और गहरी हुई. अब 6 सितंबर 2026 को सुदिव्य कुमार सोनू की अचानक विदाई ने इसे एक और मार्मिक अध्याय दे दिया है. तीनों नेता अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यक्तित्व के थे, लेकिन झारखंड के सार्वजनिक जीवन और शिक्षा व्यवस्था में तीनों की अपनी भूमिका रही. जगरनाथ महतो की जुझारू पहचान, रामदास सोरेन का लंबा जनसंघर्ष और सुदिव्य कुमार सोनू की सक्रिय राजनीतिक शैली अब झारखंड की राजनीतिक स्मृतियों का एक हिस्सा रह गया हैं. साढ़े तीन वर्षों में तीन मंत्रियों की असमय मौत का यह संयोग झारखंड की राजनीति के इतिहास में एक ऐसे अध्याय के तौर पर दर्ज हो गया है, जिसे राज्य लंबे समय तक याद रखेगा.
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