- जंतर-मंतर पर शुक्रवार रात भी भीड़ दिखी है. जहां प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं.
- प्रदर्शन स्थल पर देशभक्ति गीत, फिल्मी गाने और अलग-अगल नारे सुनाई दे रहे हैं.
- दिल्ली पुलिस भी यहां लगातार तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था बनी हुई है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के आंदोलन को लेकर शुक्रवार को भी धरना स्थल पर पिछले दिन की तुलना में प्रदर्शनकारियों की संख्या ज्यादा रही. दिल्ली पुलिस ने यहां बैरिकेडिंग बढ़ा दी है. जबकि पूरे इलाके में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती है. शुक्रवार देर रात तक प्रदर्शन स्थल पर देशभक्ति गीत, फिल्मी गाने और अलग-अगल नारे सुनाई देते रहे. हालांकि, जैसे-जैसे रात ढलती गई, प्रदर्शन स्थल पर शोर-शराबा भी कम होता गया. प्रधानमंत्री के आश्वासन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के वादे और एनटीए के कुछ अधिकारियों को हटाए जाने के बाद भी प्रदर्शन जारी है. NDTV ने प्रदर्शनकारियों से बात कर यह जानने की कोशिश की कि इन फैसलों के बावजूद उनकी क्या मांगें हैं और धरना स्थल पर उन्हें किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.

प्रदर्शनकारियों ने पार्क में गुजारी रात
धरना स्थल से सटे पार्क में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रात बिताते नजर आए. इसी दौरान NDTV की मुलाकात बलिया से आए आदित्य से हुई, जो अपने एक दोस्त को सर गोद में रखकर आराम करते हुए मोबाइल चला रहे थे. आदित्य ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से जंतर-मंतर पर हैं. उन्होंने कहा कि वह पहले अपने चाचा के घर गाजियाबाद आए थे और वहां से प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे. आदित्य ने बताया कि वह फिलहाल 11वीं कक्षा के छात्र हैं और छात्रों के समर्थन में यहां आए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के बाद वह दिल्ली घूमने की भी योजना बना रहे हैं.
'मुद्दा छात्रों से हटकर दूसरी तरफ जा रहा है'
धरना मंच से कुछ दूरी पर एनडीटीवी की मुलाकात श्वेता सुमन और सत्यम प्रभाकर से हुई. श्वेता इग्नू से BSC की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि सत्यम बिहार से BBA के छात्र हैं. सत्यम ने बताया कि वह क्रिकेट खेलने के सिलसिले में दिल्ली में रह रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि आंदोलन अपने घोषित उद्देश्य, यानी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सत्यम ने कहा 'वह पिछले पांच दिनों से प्रदर्शन में मौजूद हैं और उनके अनुसार आंदोलन की दिशा पहले की तुलना में बदलती नजर आ रही है. अब बातचीत और नारेबाजी का केंद्र केवल नीट और पेपर लीक का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि अन्य विषयों पर अधिक चर्चा हो रही है. सत्यम ने कहा कि आंदोलन का मुख्य फोकस छात्रों और उनकी मांगों पर रहना चाहिए. उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान 'आजादी' के नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि उनके अनुसार आंदोलन का उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना होना चाहिए.
श्वेता ने भी कहा कि वह अपनी बहन के साथ यह देखने आई थीं कि धरना स्थल पर क्या स्थिति है. उन्होंने बताया कि उनकी बहन नीट की तैयारी कर रही हैं. श्वेता ने कहा कि उनकी मांग है कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए.

'छात्रों के समर्थन में आया हूं'
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से आए मोहम्मद फैजान अली रज़ा ने बताया कि उन्होंने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. उनका कहना है कि वह छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे हैं. फैजान ने बताया कि फिलहाल वह कोई काम नहीं करते हैं और आगे उर्दू विषय से पढ़ाई जारी रखने की योजना है. 'सरकार को छात्रों की मांगों पर विचार करना चाहिए और यह आंदोलन एक बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है.'
युवा पेशेवरों ने भी जताई चिंता
धरना स्थल पर कुछ युवा पेशेवर भी मौजूद मिले. उन्होंने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया. लेकिन कहा कि आंदोलन का मुख्य मुद्दा शिक्षा और छात्रों की समस्याएं रहनी चाहिए. उनका कहना था कि कुछ लोग आंदोलन को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

रात में खेलते दिखे प्रदर्शनकारी
देर रात धरना स्थल पर कुछ प्रदर्शनकारी क्रिकेट और कबड्डी खेलते भी नजर आए. वहीं, कई महिला प्रदर्शनकारियों ने शौचालय की उपलब्धता और उसकी साफ-सफाई को लेकर परेशानी बताई. उनका कहना था कि आसपास शौचालयों की संख्या सीमित है और जो उपलब्ध हैं, उनकी स्वच्छता की स्थिति संतोषजनक नहीं है. उनके अनुसार, लंबे समय तक धरना स्थल पर मौजूद रहने के दौरान यह समस्या महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनी हुई है.
जंतर-मंतर पर जारी इस प्रदर्शन में छात्रों, युवाओं और विभिन्न वर्गों के लोगों की मौजूदगी दिखी, लेकिन प्रतिभागियों के बीच आंदोलन की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आई. वहीं, लंबा खिंचता धरना जहां समर्थन जुटा रहा है, वहीं बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां भी प्रदर्शनकारियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं.
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