- जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड की खुदाई के बाद सड़क पर 14 फीट गहरा गड्ढा बिना सुरक्षा इंतजाम के खुला पड़ा था
- 25 वर्षीय कमल बाइक सहित गड्ढे में गिरा और लगभग छह घंटे तक मदद के बिना वहीं पड़ा रहा
- सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति घटना स्थल पर पहुंचा लेकिन पुलिस को सूचना दिए बिना घर लौट गया
सोचिए… देश की राजधानी में एक इंसान मदद के इंतज़ार में घंटों पड़ा रहता है. लोग देखते हैं, बताते हैं, चेताते हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती है. दिल्ली जैसी महानगर में किसी की जान की कीमत क्या इतनी सस्ती हो चुकी है कि एक खुला गड्ढा उसे निगल ले और जिम्मेदार लोग सिर्फ देखने के बाद चुपचाप चलते बनें? जनकपुरी में खुले गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल की मौत ने इन्हीं सवालों को फिर से खड़ा कर दिया है.
हादसा जो टाला जा सकता था
दिल्ली जल बोर्ड की खुदाई के बाद सड़क के बीचोंबीच बना करीब 14 फीट गहरा गड्ढा पूरी तरह खुला पड़ा था. न कोई चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग, न आसपास लाइटिंग… सर्द रात की कम रोशनी में कमल अपनी बाइक के साथ सीधा इसी मौत के कुएं में जा गिरा.
पुलिस की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि कई स्तरों पर फैली गंभीर लापरवाही का परिणाम था इंजीनियरों की, सुरक्षा स्टाफ की, कॉन्ट्रैक्टर की और उस पूरे सिस्टम की जो खतरे को खतरा मानने की क्षमता खो चुका है.

‘देखा… और चला गया' सब-कॉन्ट्रैक्टर का चौंकाने वाला रोल
जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया. एक चश्मदीद परिवार ने बताया कि उन्होंने कमल को गड्ढे में गिरते देखा और तुरंत पास के सिक्योरिटी गार्ड व गड्ढे पर बने टेंट में मौजूद कर्मचारी को सूचना दी. कर्मचारी ने तुरंत सब‑कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को फोन किया.
राजेश रात में मौके पर पहुंचा भी. उसने बाइक देखी…कमल को गड्ढे में पड़ा हुआ देखा… लेकिन पुलिस को जानकारी देने या रेस्क्यू कॉल करने के बजाय वह चुपचाप घर लौट गया.कमल वहां लगभग छह घंटे तक पड़ा रहा और सुबह उसकी मौत की सूचना पुलिस को दी गई.
पुलिस के एक्शन पर उठे बड़े सवाल
चश्मदीदों के बयान, कर्मचारी की जानकारी और घटना को छुपाने की कोशिश जैसे सबूतों के आधार पर पुलिस ने सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश को गिरफ्तार कर लिया है. उससे पूछताछ जारी है कि आखिर उसने किसी को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की, और पुलिस को तुरंत सूचना देने का फैसला क्यों नहीं किया.

डीसीपी वेस्ट दराडे शरद भास्कर ने NDTV को बताया कि राजेश की भूमिका संदिग्ध होने के कारण उसे हिरासत में लिया गया है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
क्या इसे महज़ दुर्घटना मान लिया जाए?
- गड्ढे पर कोई बैरिकेडिंग नहीं
- कोई चेतावनी बोर्ड नहीं
- सड़क पर रोशनी बेहद कम
- खतरे वाली साइट पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं
- खुदाई के बाद रोड सेफ्टी बहाल नहीं की गई
- हाई‑रिस्क एरिया होने के बावजूद निगरानी नहीं
- हादसे की जानकारी छुपाई गई और समय पर रिपोर्ट नहीं की गई
- दिल्ली पुलिस की FIR के बिंदु बताते हैं कि यह एक सिस्टमेटिक फेल्योर था, जिसने कमल की जान ले ली.
कमल के पिता ने कहा कि जो हमारे साथ हुआ, वह किसी और परिवार के साथ नहीं होना चाहिए. हमने अपने बेटे के लिए सपने देखे थे, उसकी शादी की तैयारी कर रहे थे… लेकिन एक गड्ढे और लापरवाही ने सब खत्म कर दिया. दिल्ली जैसे शहर में खुले गड्ढे से मौत होना हमारे सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल है. एक लापरवाही हादसे से पहले थी जब गड्ढा खुला छोड़ा गया. दूसरी उससे भी बड़ी लापरवाही हादसे के बाद हुई जब एक ज़ख्मी को मरता छोड़ दिया गया.
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