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दिल्ली हादसा: एक परिवार ने कमल को गड्ढे में गिरता देखा, गार्ड को तुरंत बताया... फिर भी नहीं लिया गया कोई एक्शन

जनकपुरी हादसे की FIR में बताया गया कि दिल्ली जल बोर्ड की खुदाई के बाद गड्ढा बिना ढके छोड़ा गया था. न बैरिकेडिंग थी, न साइनबोर्ड, न लाइटिंग. सुरक्षा गार्ड भी नहीं थे. कॉन्ट्रैक्टर और विभाग ने जरूरी सेफ़्टी नॉर्म्स और एहतियाती कदमों का पालन नहीं किया.

दिल्ली हादसा: एक परिवार ने कमल को गड्ढे में गिरता देखा, गार्ड को तुरंत बताया... फिर भी नहीं लिया गया कोई एक्शन
  • दिल्ली में खुले सीवर गड्ढे में गिरकर कमल ध्यानी की मौत के मामले में पुलिस ने गंभीर कार्रवाई शुरू कर दी है.
  • सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति की गिरफ्तारी हुई है. राजेश को रात में कमल के गड्ढे में गिरने की खबर मिल गई थी.
  • घटना के समय एक परिवार ने कमल के गड्ढे में गिरते हुए देखा और तुरंत सिक्योरिटी गार्ड को सूचना दी थी.
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दिल्ली के जनकपुरी में सीवर खुदाई के खुले गड्ढे में 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत के मामले में अब दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां होने वाली हैं और इसी कड़ी में सबसे पहले सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति की गिरफ्तारी हो गई है. फिलहाल पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है.

हादसा देखा एक परिवार ने- तुरंत दी थी सूचना

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जिस समय हादसा हुआ, उस वक्त एक परिवार वहीं से गुजर रहा था. परिवार ने कमल को गहरे गड्ढे में गिरते हुए अपनी आंखों से देखा. उन्होंने यह जानकारी तुरंत मौके पर मौजूद सिक्योरिटी गार्ड और गड्ढे के पास टेंट में रह रहे एक शख्स (जो राजेश का कर्मचारी था) को दी.

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कर्मचारी ने तुरंत राजेश को दी सूचना

टेंट में रहने वाला कर्मचारी, जो सब-कॉन्ट्रेक्टर राजेश प्रजापति का ही आदमी था, उसने तुरंत ही फोन करके राजेश को पूरी घटना बताई. सूत्रों के मुताबिक राजेश रात में तुरंत मौके पर पहुंचा. उसने गड्ढे में गिरी बाइक देखी और कमल को गड्ढे में पड़ा हुआ भी देखा.

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राजेश ने पुलिस को क्यों नहीं किया सूचित?

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है- राजेश ने पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी? मौके पर सब कुछ देखने के बावजूद, राजेश ने पुलिस को जानकारी देने की बजाय चुपचाप घर लौट जाना चुना. यही उसके खिलाफ सबसे गंभीर सबूत माना जा रहा है.

अब होगी गिरफ्तारी

पुलिस के पास अब प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, कर्मचारी की जानकारी, राजेश की मौके पर मौजूदगी, और घटना को छुपाने के प्रयास जैसे अहम सबूत हैं. पुलिस ने इस मामले में राजेश की गिरफ्तारी कर ली है. जबकि कई जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तार अभी होनी बाकी है. कॉन्ट्रेक्टर्स, इंजीनियरों और साइट मैनेजमेंट से जुड़े लोग रडार पर हैं.

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क्यों बना मामला 'क्रिमिनल नेग्लिजेंस'?

गड्ढे पर न बैरिकेडिंग, न कोई चेतावनी बोर्ड, न पर्याप्त रोशनी, घटना के बाद भी पुलिस को समय पर न बताना. इन्हीं वजहों से मामला अब साधारण दुर्घटना न होकर गंभीर लापरवाही (Criminal Negligence) में बदल गया है. इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस की FIR भी ऐसी ही हाईस्पीड जांच की ओर इशारा करती है.

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FIR के अहम बिंदु

  • सार्वजनिक सड़क पर खुला गड्ढा बिना ढके छोड़ दिया गया था.
  • दिल्ली जल बोर्ड द्वारा की गई खुदाई के बाद रोड सेफ्टी बहाल नहीं की गई.
  • खुदाई स्थल पर कोई चेतावनी/वॉर्निंग साइनबोर्ड नहीं लगाए गए.
  • गड्ढे के चारों ओर कोई बैरिकेडिंग नहीं थी.
  • यात्रियों को अलर्ट करने के लिए न रिफ्लेक्टर थे और न ही हज़ार्ड मार्किंग.
  • कम रोशनी वाले घंटों के बावजूद कोई लाइटिंग अरेंजमेंट नहीं था.
  • स्थल पर कोई सुरक्षा गार्ड या मॉनिटरिंग स्टाफ मौजूद नहीं था.
  • कॉन्ट्रैक्टर ने बेसिक सेफ़्टी नॉर्म्स का पालन नहीं किया.
  • विभाग को खुदाई की जानकारी होने के बावजूद अनिवार्य एहतियाती कदम नहीं उठाए गए.

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