लद्दाख में भी अब जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक बेंच बैठेगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक बेंच बनाने का फैसला लिया है.
सरकार के इस फैसले से अब लद्दाख में रहने वालों की अदालत तक पहुंच काफी बेहतर होगी. गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि लद्दाख के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें मिलने वाली कानूनी सेवाओं के लिए लगने वाला समय कम हो जाएगा.
The Union Cabinet, under the leadership of the PM Shri @narendramodi Ji, has decided to set up a bench of the High Court of Jammu and Kashmir in Ladakh. This will significantly enhance access to justice for citizens living in remote areas of Ladakh by reducing the time required…
— Amit Shah (@AmitShah) August 20, 2026
क्यों मायने रखता है ये फैसला?
सरकार का ये फैसला लद्दाख के लिए काफी मायने रखता है. अब तक लद्दाख के लोगों का अगर कोई मामला हाई कोर्ट जाता था या उन्हें हाई कोर्ट में अपील करनी होती थी तो उसके लिए जम्मू-कश्मीर जाना पड़ता था. लेकिन अब हाई कोर्ट की एक बेंच लद्दाख में भी होगी, इसलिए अब वहां के लोगों को इंसाफ के लिए जम्मू-कश्मीर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
इससे फायदा क्या होगा?
हाई कोर्ट कैसी थी अब तक: 2019 में जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया तो दोनों के लिए एक साझा हाई कोर्ट बनाया गया. इसका आधिकारिक नाम 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट' रखा गया.
अब क्या बदलेगा: ये हाई कोर्ट जम्मू-कश्मीर से ही चलती थी. गर्मियों में श्रीनगर और सर्दियों में जम्मू से. अब लेकिन लद्दाख में भी हाई कोर्ट की एक बेंच होगी. इसका मतलब हुआ कि लद्दाख के लोगों को बार-बार जम्मू या कश्मीर आने की जरूरत नहीं होगी.
- परेशानी क्या थी: सर्दियों में बर्फबारी के कारण रास्ता बंद हो जाता था. ऐसे में लद्दाख से जम्मू जाना खर्चीला होता था. इसके अलावा, मामले की अपील या सुनवाई के लिए लद्दाख के लोगों को सैकड़ों किलोमीटर दूर भी जाना पड़ता था.

लद्दाख में पहली बार हाई कोर्ट की बेंच
लद्दाख में पहली बार हाई कोर्ट की बेंच बनाने का फैसला लिया गया है. 2019 से पहले तो लद्दाख और जम्मू-कश्मीर एक ही थे. इसलिए हाई कोर्ट भी एक था.
2019 में जब दोनों को अलग-अलग किया गया, तब भी लद्दाख को अपना हाई कोर्ट नहीं मिला. केंद्र शासित प्रदेश बनने के 7 साल बाद लद्दाख को हाई कोर्ट की अपनी बेंच मिल गई है. अब हाई कोर्ट के जज रोस्टर के हिसाब से लद्दाख की बेंच में बैठेंगे और सुनवाई करेंगे.
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