जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में एक ऐसी किताब पहुंच गई, जिस पर बवाल मच गया. इस किताब में खूंखार आतंकी हाफिज सईद की तारीफ की गई थी तो वहीं मकबूल भट जैसे कई आतंकियों को महान बताया गया. पुस्तक में देशभक्ति की शिक्षा दिए जाने की बजाय आतंकियों को ग्लोरिफाई किया गया था, जिस पर तूफान खड़ा हो गया. उमर अब्दुल्ला सरकार को जैसे ही इसकी भनक लगी तो उसने लाइब्रेरी से किताब वापस मंगाई. भाजपा ने इसे लेकर हमला बोलते हुए कहा कि यह तो 'अकादमिक जिहाद' का मामला है.
पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर नाम से लाइब्रेरी में रखी इस किताब में मकबूल भट जैसे आतंकियों की तारीफ की गई. इसके अलावा सैयद अली शाह गिलानी, मसर्रत आलम और मीरवाइज फारूक जैसे अलगाववादियों की नीति को भी सही ठहराते हुए प्रशंसा की गई. इस किताब को लेकर ऐसा बवाल मचा कि लोगों ने कहा कि यह देश को तोड़ने वाले एजेंडे को बढ़ाती है. भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने तो साफ कहा कि यह पुस्तक अकादमिक जिहाद जैसी है. इसके उद्देश्य यही है कि जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी के दिमाग को खराब कर दिया जाए.
उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि उमर अब्दुल्ला अपनी एजुकेशन मिनिस्टर शकीना इटू को बाहर निकालें. इसके अलावा ऐसी किताब की खरीद करने और स्कूलों में रखवाने वालों को भी सजा दी जाए. वहीं इस मामले में पूछा गया तो उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मैंने यह पुस्तक नहीं पढ़ी है. इसके अलावा उनका कहना था कि मैंने तो यह पुस्तक देखी ही नहीं है.
विवाद खूब बढ़ा तो तुरंत ही सरकार ने स्कूलों से किताब को वापस मंगा लिया. इस मामले को सबसे पहले जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम ने सामने लाने का काम किया था. इसके बाद इस किताब की खूब आलोचना हुई. किसी ने आपराधिक कार्यवाही की बात कही तो कोई कहने लगा कि इसे बैन किया जाए. अंत में राज्य सरकार ने झुकते हुए पुस्तक को सभी स्कूलों से वापस मंगा लिया है.
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