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जामिया में विरोध-प्रदर्शन का आज 16वां दिन, भूख हड़ताल और सख्ती के बाद भी छात्रों के हौसले बुलंद, मांगों से हटने को तैयार नहीं

जामिया में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर को शुरू हुआ था. छात्र लगभग दो दशकों के बाद छात्र संघ की बहाली और चुनावों को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन की चेतावनी और कक्षाओं को ऑनलाइन करने के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्र प्रस्तावित समझौते को लेकर बंटे हुए हैं.

जामिया में विरोध-प्रदर्शन का आज 16वां दिन, भूख हड़ताल और सख्ती के बाद भी छात्रों के हौसले बुलंद, मांगों से हटने को तैयार नहीं
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन जारी.
PTI
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 16 दिनों से छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है
  • विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन खाली करने का निर्देश दिया है
  • प्रशासन ने निलंबन आदेश वापस लिए और सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति गठित की है
दिल्ली:

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 16 दिनों से छात्रों का विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी है. प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच गतिरोध लगातार चल रहा है. प्रदर्शनकारी गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉनके पास जमा हैं. यूनिवर्सिटी ने छात्रों को अंतिम चेतावनी देते हुए तुरंत नॉर्थ कैंपस स्थित गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन को खाली करने का निर्देश दिया है. चेतावनी में कहा गया है कि अगर छात्रों ने आदेश नहीं माना तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई होगी. साथ ही अगले आदेश तक सभी कोर्स की कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी.

जामिया में 16 दिनों से विरोध-प्रदर्शन

जामिया के छात्र पिछले 16 दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. वह छात्र संघ को बहाल कर चुनाव कराने की मांग पर अड़े हैं. छात्रों का कहना है कि 2006 के बाद से यहां कोई चुनाव नहीं हुए हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन का नया आदेश ऐसे समय में आया है, प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ उनका बातचीत के बाद हुए एक समझौते को लेकर विवाद चल रहा है. छात्रों के एक गुट ने अपना आंदोलन वापस ले लिया था, वहीं दूसरे गुट ने इसे मानने से इनकार कर दिया. उनका तर्क है कि यूनिवर्सिटी ने छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और चुनाव कराने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है.

छात्रों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का आदेश 

प्रशासन ने आंदोलन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन आदेशों और 'शो-कॉज' नोटिसों को वापस ले लिया है. इसके अलावा, सुरक्षाकर्मियों के बर्ताव की जांच के लिए एक समिति बनाने का भी ऐलान किया है. छात्रों से कहा गया कि वे यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ दिए गए कथित अपमानजनक बयानों और सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और संबंधित कंटेंट को हटा दें.

हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक गुट ने अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया. उनकी मांग है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्र संघ चुनाव के लिए एक निश्चित तारीख बताए. उन्होंने प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की अपनी मांग को फिर दोहराया.

छात्रों की भूख हड़ताल जारी

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने भी अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करने से इनकार किया है. बिहार के मुंगेर से आए राजनीति विज्ञान के पोस्ट-ग्रेजुएट छात्र रितिक कुमार ने NDTV को बताया कि वह पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. छात्रों की मुख्य मांग चुनाव के लिए एक तय तारीख का ऐलान है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव के लिए एक निश्चित तारीख दे. इस मामले पर अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों पर आंदोलन वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है. हर सुबह एक मेडिकल टीम भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की जांच करने आती है, लेकिन छात्रों को खाना और पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. साथ ही उन्होंने कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई. रितिक कुमार ने कहा कि छात्रों ने नियमित ऑफलाइन कक्षाओं के लिए फीस दी है और वे कैंपस में ही पढ़ाई करना चाहते हैं.

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क्या हैं प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें?

प्रदर्शन कर रहे अन्य छात्र, फैजान खान ने बताया कि छात्र पिछले 15 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. वे वाइस-चांसलर से स्पष्ट और पारदर्शी बातचीत चाहते हैं. सभी चाहते हैं कि छात्र संघ का गठन हो, ताकि कैंपस में चुनाव कराए जा सकें. फैजान ने देर रात कैंपस खाली करने के निर्देश देने और कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने के फैसले पर भी सवाल उठाए. उन्होंने तीन मुख्य मांगों पर जोर दिया, जिनमें छात्र संघ चुनावों की बहाली, विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार का इस्तीफा, और विरोध प्रदर्शन के दौरान जारी किए गए निलंबन तथा 'कारण बताओ' नोटिसों को वापस लेना है.

जामिया में सांसदों के दौरे को लेकर तीन FIR

विपक्षी सांसदों के विश्वविद्यालय परिसर में आने और आने की कोशिश करने के बाद, इस आंदोलन को लेकर पुलिस जांच भी शुरू हो गई है.
इस मामले में तीन FIR दर्ज की गई हैं. अपनी शिकायत में, जामिया के रजिस्ट्रार मो. महताब आलम रिज़वी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद अलग-अलग मौकों पर बिना अनुमति के परिसर में दाखिल हुए.

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी आंदोलन के 10वें दिन 21 अक्टूबर को परिसर में आए. 23 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने यूनिवर्सिटी में जाने की कोशिश की. शिकायत में नदवी का भी जिक्र है, जिन्हें परिसर में जाते समय हिरासत में ले लिया गया था. आरोप है कि उन्होंने आने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी थी.

कब शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन

बता दें कि जामिया में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर को शुरू हुआ था. छात्र लगभग दो दशकों के बाद छात्र संघ की बहाली और चुनावों को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन की चेतावनी और कक्षाओं को ऑनलाइन करने के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्र प्रस्तावित समझौते को लेकर बंटे हुए हैं. छात्रों का एक गुट इस बात पर अड़ा है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

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