- भारत की विदेश नीति संतुलित और स्पष्ट है, जो किसी के दबाव में आए बिना स्वतंत्र रूप से निर्णय लेती है
- भारत ने पश्चिम एशिया संकट में संयम और कूटनीति के माध्यम से विवाद समाप्त करने का आह्वान किया है
- पड़ोसी देशों को ऊर्जा सहायता प्रदान करना भारत की प्राथमिकता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा बढ़ती है
भारत अपनी लाइन खुद खींचता है. वो ना तो किसी से आंखें झुकाकर बात करता है और ना ही किसी को आंखें दिखाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों पहले ये बात कही थी और भारत की विदेश नीति में ये मंत्र सा बन गया है. आज जब यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट और एशिया में जंगें चल रही हैं तो भारत का रुख बेहद स्पष्ट और संतुलित है. वो ना तो रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी के दबाव में आया और ना ही अब तक ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में. पाकिस्तान-अफगानिस्तान की नई जंग में भी भारत का स्टैंड एकदम साफ है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्त रणधीर जायसवाल ने आज नियमित प्रेस कांफ्रेंस में हर बात को क्लियर कर दिया...

- पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के बारे में - रणधीर जायसवाल ने कहा कि जहां तक पाकिस्तान का सवाल है, उसका गुप्त परमाणु अप्रसार गतिविधियों का लंबा इतिहास रहा है. ऐसे बयान एक बार फिर इस बात को स्पष्ट करते हैं कि इस मामले में उसका रिकॉर्ड कैसा है. जो लोग इस बारे में नहीं जानते, उन्हें बता दें कि अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने खुफिया समुदाय के 2026 के वार्षिक खतरे के आकलन को प्रस्तुत करते हुए कहा था कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण परमाणु खतरे हैं.
- क्या कहा था तुलसी ने- अमेरिका में नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने पेशी के दौरान कहा कि इंटेलिजेंस कम्युनिटी का आकलन है कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान तेजी से अपनी मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं. ये देश नए, एडवांस और घातक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर शोध और विकास में जुटे हुए हैं. तुलसी ने कहा कि इन देशों द्वारा तैयार की जा रही मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक दोनों ही तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं. सबसे चिंताजनक बात ये है कि इन मिसाइलों की मारक क्षमता इतनी अधिक है कि इन्होंने अब अमेरिका की मुख्य भूमि (Homeland) को अपनी सीधी रेंज में ले लिया है.
- चाबहार के बारे में - मैंने इस विशेष मुद्दे पर पहले भी टिप्पणी की थी, इसलिए मैं अपनी बात दोहराना चाहूंगा. अमेरिकी पक्ष ने चाबहार बंदरगाह के लिए सशर्त प्रतिबंधों में छूट को 26 अप्रैल, 2026 तक बढ़ाने का निर्देश दिया है. सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों को संबोधित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रही है.
- पश्चिम एशिया संकट पर - "हमने कई बयान जारी किए हैं, जिनमें हमने अपना रुख, अपनी स्थिति और इस मुद्दे पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है. हमने संयम बरतने का आह्वान किया है. हमने तनाव कम करने का आह्वान किया है. हमने कूटनीति के माध्यम से बातचीत का आह्वान किया है, ताकि इस विशेष संघर्ष का जल्द से जल्द अंत हो सके. पश्चिम एशिया संकट पर हमारा यही रुख है."
- पाकिस्तान-अफगानिस्तान वार पर: "...हमने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर हमले देखे हैं. हमने इन हमलों की निंदा की है, क्योंकि इन्होंने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है और लोगों को भारी पीड़ा पहुंचाई है. आपने हमारा बयान देखा होगा. हम एक बार फिर पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए इन बर्बर हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं. जाहिर है, इससे क्षेत्र का माहौल खराब होता है. यह बिल्कुल भी मददगार नहीं है."
- पड़ोसी देशों से ऊर्जा संबंधी अनुरोधों पर: "ऊर्जा के संबंध में, हमें अपने कई पड़ोसी देशों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं, और मैंने इस बारे में पहले भी बात की थी. हमें बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और कुछ अन्य पड़ोसी देशों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं. जैसा कि मैंने पहले बताया था, भारत 2007 से विभिन्न परिवहन माध्यमों से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है. हम अभी भी बांग्लादेश और अपने अन्य पड़ोसियों की सहायता करना जारी रखे हुए हैं. यह सहायता हमारी अपनी आवश्यकताओं, शोधन क्षमता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए की जा रही है."
- डोवाल-सर्जियो की बातचीत के बारे में: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बीच हुई बातचीत सामान्य बातचीत है, जो नियमित रूप से होती रहती है. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा की. द्विपक्षीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी मुद्दों पर इन वार्ताओं में चर्चा की जाती है.
- विदेश मंत्री जयशंकर की अपने समकक्षों से बातचीत पर: "विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के अपने समकक्ष से बात की है. उन्होंने GCC और पश्चिम एशिया सहित कई अन्य विदेश मंत्रियों से भी बात की है और वहां हो रहे घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए हैं. पश्चिम एशिया संघर्ष पर हमारा रुख आप जानते ही हैं, और हम बार-बार यही दोहरा रहे हैं कि इस संघर्ष का जल्द से जल्द अंत होना चाहिए, यह ध्यान में रखते हुए कि आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना है."
- वैश्विक नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत पर: "हम सभी पक्षों से बात कर रहे हैं. आज हमारे प्रधानमंत्री ने ओमान के सुल्तान से भी बात की. उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति और मलेशिया के प्रधानमंत्री से भी बात की. इस प्रकार वैश्विक नेता आपस में बातचीत कर रहे हैं. हमारे प्रधानमंत्री भी बात कर रहे हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि हम स्थिति को कैसे देखते हैं और हमारी प्राथमिकता क्या है, हमें आगे कैसे बढ़ना चाहिए..."
- ऊर्जा आपूर्ति, तेल और गैस टैंकरों पर: ऊर्जा आपूर्ति पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "यह चिंता का विषय रहा है. ऊर्जा परिवहन मार्गों पर असर पड़ा है. एलपीजी की आपूर्ति चिंता का विषय है. इसलिए, हम घरेलू खपत को प्राथमिकता दे रहे हैं. उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा. उसके बाद हम देखेंगे कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी की आपूर्ति कैसे की जाए. लेकिन आपूर्ति की कमी के कारण यह चिंता का विषय है. हाल ही में दो टैंकर आए हैं. इन दो टैंकरों से पाइपलाइन में आपूर्ति बढ़ी है. हम अपने स्रोतों में विविधता लाने की भी कोशिश कर रहे हैं, दुनिया के अन्य हिस्सों से एलपीजी की आपूर्ति तलाश रहे हैं. हम इस पर काम कर रहे हैं, और अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे..." जायसवाल ने यह भी कहा, "हम दुनिया भर से तेल खरीदते हैं. अगर दुनिया के X या Y हिस्से से टैंकर आ रहे हैं, तो यह सामान्य बात है. ऊर्जा खरीद के चलते और भी कई टैंकर आने वाले हैं. हम ऊर्जा खरीद रहे हैं. हम दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कच्चा तेल खरीद रहे हैं, और इस संबंध में हमारे पास विविध विकल्प हैं और यह जारी रहेगा. हम रूस सहित कई स्रोतों से खरीद रहे हैं. मुझे नहीं पता कि यह इतनी बड़ी खबर क्यों बन रही है. कई जहाज डॉक पर आने वाले हैं, और यह एक निरंतर प्रक्रिया है...
- भारत-अमेरिका व्यापार पर (रॉयटर्स की रिपोर्ट पर) - "हमने रिपोर्ट देखी. यह सटीक नहीं है. भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों व्यापार संबंधी सभी मामलों पर एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संपर्क में हैं. यह उस विशेष मुद्दे पर हमारी वर्तमान स्थिति का सटीक प्रतिबिंब नहीं है."
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