- श्रीलंकाई MP हर्षा डी सिल्वा ने कहा कि ईरान को नाविकों के शव सौंपने में अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन होगा.
- अमेरिकी हमले में मारे गए करीब 80 ईरानी नाविकों के शवों का प्रबंधन श्रीलंका के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.
- श्रीलंका की सरकार की ओर से तटीय अस्पतालों में शवों के प्रबंधन के लिए अब निजी क्षेत्र से सहायता मांगी है.
श्रीलंका के तटीय इलाकों के करीब अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. श्रीलंका के सांसद हर्षा डी सिल्वा ने कहा है कि हमले में मारे गए ईरानी नाविकों के शव ईरान को सौंपने की प्रक्रिया में सभी अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. ईरान के अधिकारियों ने श्रीलंका से अनुरोध किया है कि युद्धपोत पर हुए हमले में मारे गए सभी नाविकों के शव सौंपें जाएं, जिससे उन्हें ईरान वापस लाकर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जा सके.
सांसद हर्षा डी सिल्वा ने एनडीटीवी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि नाविकों के शव ईरान को सौंपने के दौरान सभी अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमें करीब 80 ईरान के नाविकों के शव मिले हैं.
शवों के प्रबंधन के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं: सांसद
साथ ही सांसद ने कहा कि श्रीलंका के तटीय इलाकों के अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में शवों का प्रबंधन करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, इसीलिए सरकार ने निजी क्षेत्र से मदद की गुहार लगाई है.
अपने मछुआरों को श्रीलंका ने दी है ये सलाह
श्रीलंका के तटीय इलाकों के करीब इंटरनेशनल वाटर्स पर हुए अमेरिका के इस घातक हमले को लेकर श्रीलंका सकते में है. सांसद ने एनडीटीवी से कहा कि श्रीलंका के तटीय इलाकों के आसपास बढ़ते खतरे को देखते हुए श्रीलंकाई सरकार ने अपने मछुआरों को सलाह दी है कि वे श्रीलंका की जल सीमा से आगे समुद्र में न जाएं.
श्रीलंका के तट के पास हुए इस हमले को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं.
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