मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान आईएनएस ब्रह्मपुत्र के पलट जाने की घटना के करीब दो साल बाद भारतीय नौसेना ने दो अधिकारियों का कोर्ट मार्शल शुरू किया है. इस हादसे में एक नौसैनिक की मौत हो गई थी.इस दुर्घटना में गाइडेड मिसाइल से लैस इस युद्धपोत को भारी नुकसान पहुंचा था.यह भारत में बने गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट से तैनात युद्धपोतों की अपनी श्रेणी का पहला जहाज है. घटना के बाद आईएनएस ब्रह्मपुत्र अभी भी ऑपरेशनल नहीं हो पाया है.उसका अभी परीक्षण चल रहा है.
कब शुरू हुआ कोर्ट मार्शल
कोर्ट मार्शल की कार्यवाही 12 अक्टूबर को मुंबई में शुरू हुई. जिन अधिकारियों पर औपचारिक आरोप लगाए गए हैं, उनमें जहाज के कमांडिंग ऑफिसर यानी कप्तान और उस दिन ड्यूटी पर तैनात लेफ्टिनेंट कमांडर शामिल हैं. दोनों पर अपने कर्तव्यों को निभाने में लापरवाही बरतने का आरोप है. कप्तान पर नौसेना के जहाज को खतरे में डालने का भी आरोप लगाया गया है.
सैन्य अदालत इन आरोपों पर फैसला करेगी. अगर दोनों अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें फटकार, वरिष्ठता में कमी से लेकर दो साल तक की जेल की सजा हो सकती है.
इस मामले ने जुलाई 2024 में हुए हादसे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. खास तौर पर इस बात पर ध्यान गया है कि मरम्मत के दौरान युद्धपोत में लगी आग के बाद उसे बचाने के लिए किस तरह बड़े स्तर पर अभियान चलाना पड़ा था.
नौसेना के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा,''हादसे की वजह का पता लगाना, जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करना बेहद जरूरी है.''
कैसे पटला युद्धपोत
यह घटना 21 जुलाई 2024 की है. उस दिन मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान आईएनएस ब्रह्मपुत्र में आग लग गई.आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों ने जहाज के भीतर बड़ी मात्रा में पानी डाला. इससे युद्धपोत का संतुलन बिगड़ गया और वह बाएं तरफ झुकता चला गया और अंत में एक तरफ पलट गया.
इस हादसे में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की मौत हो गई. जहाज के ज्यादातर कर्मचारी गैंगवे के रास्ते बाहर निकल गए, लेकिन कुछ को पानी में कूदकर तैरते हुए सुरक्षित जगह पहुंचना पड़ा. जहाज से बाहर निकलने के दौरान सिंह लापता हो गए थे. बाद में उनका शव बरामद किया गया.
इस हादसे ने बड़े युद्धपोतों में आग बुझाने के दौरान होने वाले खतरों को सामने ला दिया. जहाज के भीतर जमा पानी उसके संतुलन को बिगाड़ सकता है. इस घटना के बाद मरम्मत के काम की निगरानी और सुरक्षा के इंतजामों पर भी सवाल उठे.युद्धपोत का ढांचा काफी जटिल होता है. इसमें कई तरह की मशीनें, उपकरण और अलग-अलग हिस्से होते हैं. इसलिए हादसे की जांच के लिए सभी जानकारियों और रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच करना जरूरी है

यह घटना 21 जुलाई 2024 की है.उस दिन मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान आईएनएस ब्रह्मपुत्र में आग लग गई थी.आग बुझाने के बाद जहाज पानी में पलट गया था.
Photo Credit: Indian Navy
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नौसेना ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर यह नहीं बताया है कि दोनों अधिकारियों पर लगाए गए आरोप किन खास कामों या चूकों से जुड़े हैं. कोर्ट मार्शल में यह जांच की जाएगी कि हादसे की वजह बनने वाली घटनाओं के लिए दोनों अधिकारी किस हद तक जिम्मेदार थे.
कई महीने बाद सीधा हो पाया था आईएनएस ब्रह्मपुत्र
इस हादसे में जहाज को इतना गंभीर नुकसान हुआ था कि उसके दोबारा समुद्र में उतरने की संभावना भी साफ नहीं थी.
नौसेना ने युद्धपोत को दोबारा सीधा करने के लिए लंबे समय तक अभियान चलाया. इसमें कई महीने लग गए. इसके बाद जहाज की मरम्मत और उसे पहले जैसी स्थिति में लाने का काम जारी रहा.अब जहाज का परीक्षण किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इसे अभी औपचारिक रूप से दोबारा सेवा में शामिल नहीं किया गया है. उम्मीद है कि अगले साल तक यह समुद्र में चलने लायक हो जाएगा.
आईएनएस ब्रह्मपुत्र भारत में बनाए गए गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट युद्धपोतों की अपनी श्रेणी का पहला जहाज है. इसे अप्रैल 2000 में नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था. इसका निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने किया था. इस युद्धपोत का वजन 3,850 टन है. इसकी लंबाई 125 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है. इस पर करीब 370 कर्मचारी तैनात रहते हैं. इनमें 40 अधिकारी शामिल हैं.
एसटीएफ ने की सभी कमांड में सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा
हादसे के बाद नौसेना ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की है. तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने एक रियर एडमिरल के नेतृ्त्व में विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ)का गठन किया था. इस टास्क फोर्स को नौसेना के जहाजों में मौजूद सुरक्षा संबंधी कमजोरियों का पता लगाने और हादसों को रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई थी. इस टास्क फोर्स का काम सिर्फ आईएनएस ब्रह्मपुत्र तक सीमित नहीं था. इसमें नौसेना के सभी कमांड, प्रतिष्ठानों और इकाइयों में सुरक्षा के तरीकों, इंतजामों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की समीक्षा शामिल थी.
टास्क फोर्स ने अपनी सिफारिशें सौंप दीं है. इन सिफारिशों को पूरे नौसेना में लागू किया गया है. इसका मकसद सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करना और जहाजों पर होने वाले सभी तरह के कामों, खासकर मरम्मत और रखरखाव के दौरान प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना था.
अब कोर्ट मार्शल में इस बात की जांच होगी कि क्या इस हादसे के पीछे किसी अधिकारी की लापरवाही थी. यह कार्यवाही ऐसे समय हो रही है, जब नौसेना उसी डॉकयार्ड में जहाज पलटने की दो घटनाओं के बाद सुरक्षा प्रक्रियाओं को और मजबूत करने में जुटी है.
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