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This Article is From May 31, 2019

चीन से पिछड़ा भारत, छिन गया रुतबा; जीडीपी विकास दर पांच साल के सबसे निचले स्तर पर

जीडीपी (GDP) विकास दर बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 5.8 फीसदी रही, वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.39 प्रतिशत रहा

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भारत वित्तीय वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर में चीन से पिछड़ गया.
  • वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 फीसदी रही
  • आर्थिक विकास दर घटने का कारण कृषि, खनन क्षेत्र की वृद्धि दर में कमी
  • 31 मार्च 2019 तक राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपये रहा
नई दिल्ली:

भारत के सकल घरेलू उत्पाद (gross domestic product) यानी कि GDP में जनवरी से मार्च की अवधि में 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जाहिर हुआ है. इसके साथ ही भारत चीन से पिछड़ गया. भारत ने डेढ़ साल में पहली बार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का रुतबा खो दिया. जबकि चीन आगे बढ़ गया. चीन की अर्थव्यवस्था ने मार्च तिमाही में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है.

वित्तीय वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर पिछले साल की समान अवधि से घटकर 5.8 फीसदी रह गई है. वित्त वर्ष 2017-18 में चौथी तिमाही में देश की जीडीपी विकास दर 7.7 फीसदी थी.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी वृद्धि दर (GDP Growth Rate) 6.8 फीसदी रही, जो कि जीडीपी विकास दर का पिछले पांच साल का सबसे निचला स्तर है. आंकड़ों के अनुसार, देश की आर्थिक विकास दर घटने का मुख्य कारण कृषि और खनन क्षेत्र की वृद्धि दर में कमी है.

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कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र की संवृद्धि दर वित्त वर्ष 2018-19 में 2.9 फीसदी रही जबकि पिछले साल यह पांच फीसदी थी. आलोच्य वित्त वर्ष में खनन व उत्खनन क्षेत्र की संवृद्धि दर 1.3 फीसदी रही जबकि उससे पिछले साल यह 5.1 फीसदी थी.

वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.39 प्रतिशत रहा है. यह बजट के 3.40 प्रतिशत के संशोधित अनुमान की तुलना में कम है.

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राजकोषीय घाटे के बजट के संशोधित अनुमान से कम रहने का मुख्य कारण कर से अन्यत्र अन्य मदों में प्राप्त होने वाले राजस्व में वृद्धि तथा खर्च का कम रहना है. आंकड़ों के संदर्भ में कहा जाए तो 31 मार्च 2019 के अंत में राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपये रहा है, जबकि बजट में राजकोषीय घाटे के 6.34 लाख करोड़ रुपये रहने का संशोधित पूर्वानुमान व्यक्त किया गया था.

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राजकोषीय घाटे के आंकड़े हालांकि बढ़े हैं लेकिन जीडीपी (GDP) के बढ़े आंकड़े से इसकी तुलना करने पर यह 3.39 प्रतिशत रहा है. महालेखा नियंत्रक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.39% रहा. हालांकि, वास्तविक आंकड़ों में राजकोषीय घाटा बढ़ा है, लेकिन जीडीपी बढ़ने के कारण इसकी तुलना में राजकोषीय घाटा का अनुपात कम हुआ है.

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