- भारतीय मूल के बिजनेसमैन ने खुद को CIA एजेंट बताकर इंडोनेशिया के सीनियर अधिकारियों से करीबी रिश्ता बनाया
- श्रीवास्तव ने 2020 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ हाई-लेवल डिफेंस डील्स की बैठक में हिस्सा लिया था
- अमेरिका ने 2022 में इंडोनेशिया को फाइटर जेट्स और उपकरणों की 13.9 अरब डॉलर की डील की मंजूरी दी थी
भारतीय मूल के एक बिजनेसमैन पर आरोप है कि उसने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ करीबी रिश्ते बनाने के लिए खुद को CIA एजेंट बताया, ताकि अरबों डॉलर की डिफेंस डील हासिल की जा सके. 'ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट' (OCCRP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव नाम के इस बिजनेसमैन ने खुद को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) का ऑपरेटिव बताया था.
कैसे पता चला फर्जीवाड़े का
रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के पूर्व रक्षा मंत्री और अब राष्ट्रपति बन चुके प्राबोवो सुबियांतो के साथ संबंध बनाए और कथित तौर पर अपना उपनाम "मिस्टर जी" (Mr G) रखा. आरोप है कि वह 2020 में वॉशिंगटन डीसी और जकार्ता में हुई हाई-लेवल मीटिंग्स में प्राबोवो के साथ शामिल हुआ था, जहां फाइटर जेट और दूसरे रक्षा उपकरणों की खरीद पर चर्चा हुई थी. यह रिपोर्ट कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क की अदालतों में उनके पूर्व बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट द्वारा दायर किए गए सिविल मुकदमों पर आधारित है. आरोप है कि ट्रोस्ट ने श्रीवास्तव को अपनी कंपनी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी दी थी.
फोन कॉल्स हैं रिकॉर्ड
ट्रोस्ट के अनुसार, श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के प्रभावशाली बिजनेस लीडर्स के साथ भी संबंध बनाए, जिनमें सुबियांतो के भाई और अरसारी ग्रुप के चेयरमैन हाशिम जोजोहादिकुसुमो शामिल हैं. ट्रोस्ट ने श्रीवास्तव के फोन कॉल्स भी रिकॉर्ड किए और मुकदमे में जमा कर दिया. श्रीवास्तव ने रिकॉर्ड की गई फोन कॉल्स में दावा किया कि वह CIA के लिए काम करते थे. मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने इस दावे का इस्तेमाल इंडोनेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों का भरोसा जीतने और सरकार की अहम बैठकों तक पहुंच हासिल करने के लिए किया. कहा जाता है कि श्रीवास्तव ने लोगों को बताया था कि उन्होंने 2002 के बाली बम धमाकों (इंडोनेशिया में हुए इस आतंकवादी हमले में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे) के जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में मदद की थी. उन्होंने यह भी दावा किया था कि सुबियांतो को अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.
ये हुई थी डिफेंस डील
2020 में, श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया से फाइटर जेट और दूसरे मिलिट्री इक्विपमेंट की संभावित खरीद के लिए तीन 'लेटर ऑफ इंटेंट' (LOI) हासिल किए. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 2021 और 2022 में दो और डिफेंस प्रोजेक्ट्स के लिए एक और 'लेटर ऑफ इंटेंट' और एक 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) हासिल किया. 2020 और 2022 के बीच, श्रीवास्तव से जुड़ी चार कंपनियों ने इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और सरकारी रक्षा कंपनी के साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े पांच शुरुआती समझौतों पर हस्ताक्षर किए. प्रस्तावित डील में 36 F-15 फाइटर जेट, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की बिक्री के साथ-साथ इंडोनेशिया के लिए एक मिलिट्री कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाना भी शामिल था.
हैरानी ये कि अमेरिका ने बेचा भी
2022 में, अमेरिका ने इंडोनेशिया को 36 F-15 फाइटर जेट और उनसे जुड़े उपकरण बेचने की मंजूरी दी थी; यह डील 13.9 अरब डॉलर तक की थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीवास्तव से जुड़ी चार कंपनियां 'शेल कंपनियां' थीं और इन कंपनियों ने पहले कभी भी डिफेंस प्रोक्योरमेंट (रक्षा खरीद) के क्षेत्र में काम नहीं किया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने इंडोनेशिया को F-15 फाइटर जेट बेचने के प्रस्ताव की घोषणा की, तो उस आधिकारिक डील में श्रीवास्तव की किसी भी कंपनी का नाम शामिल नहीं था.
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