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टी-90 टैंक गनर्स की ट्रेनिंग के लिए AI सिमुलेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय, हर गलती पकड़ेगा सिस्टम

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी‑90 टैंक गनर्स की ट्रेनिंग के लिए AI‑आधारित नए गनरी सिमुलेटर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इन सिमुलेटरों से बिना असली फायरिंग के गनर्स को अलग‑अलग हालात में बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे सेना की तैयारी और सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी.

टी-90 टैंक गनर्स की ट्रेनिंग के लिए AI सिमुलेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय, हर गलती पकड़ेगा सिस्टम
  • भारतीय रक्षा मंत्रालय ने टी‑90 टैंक गनर्स के लिए लगभग पचास बेसिक गनरी सिमुलेटर खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है
  • सिमुलेटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग होगा जो गनर्स को स्मार्ट ट्रेनिंग और गलती सुधार के सुझाव देगा
  • सिमुलेटर कठिन मौसम और इलाकों में काम करने के लिए सैन्य स्तर के मजबूत उपकरण होंगे
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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी‑90 टैंक गनर्स की ट्रेनिंग के लिए नए सिमुलेटर खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (RFI) जारी किया गया है. इस योजना के तहत करीब 50 बेसिक गनरी सिमुलेटर खरीदे जाएंगे, जिनसे गनर्स को बिना असली फायरिंग रेंज के प्रशिक्षण दिया जा सकेगा. इन सिमुलेटरों को मजबूत और सैन्य स्तर का बनाया जाएगा, जो अलग‑अलग मौसम और कठिन इलाकों में भी काम कर सकेंगे. इनकी मदद से गनर्स को बेसिक और एडवांस दोनों तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी और यह असली फायरिंग जैसी परिस्थितियों को भी दिखा सकेंगे.

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पूरी फायरिंग प्रक्रिया की ट्रेनिंग

सिमुलेटर की मदद से गनर पूरी फायरिंग प्रक्रिया की प्रैक्टिस कर सकेगा. इसमें टारगेट की पहचान, ट्रैकिंग और फायरिंग भी शामिल होगी. गनर्स को 125mm मुख्य गन, 7.62mm मशीन गन, INVAR मिसाइल और स्मोक ग्रेनेड लॉन्चर की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. यह पूरी व्यवस्था टी‑90 टैंक के गनर स्टेशन जैसी सेटिंग में होगी. सिमुलेटर में असली जैसा झटका और लाइटिंग इफेक्ट होंगे. ऑटो‑लोडर और फायरिंग का अनुभव भी एकदम असल जैसा ही होगा. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे गनर्स को स्मार्ट ट्रेनिंग मिल सके. दुश्मन की कठिनाई हर लेवल पर बढ़ती जाएगी और यह सिस्टम सिंगल और मल्टीप्लेयर मिशन को सपोर्ट करेगा.

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भारतीय सीमाओं जैसे हालात में अभ्यास

ट्रेनिंग भारत की सीमाओं जैसे इलाकों पर आधारित होगी. AI सिस्टम खुद गनर की गलती पहचान लेगा और सुधार के सुझाव देगा. इंस्ट्रक्टर सिस्टम के जरिए ट्रेनिंग को कंट्रोल किया जा सकेगा, साथ ही परफॉर्मेंस रिकॉर्ड और रीप्ले का भी ऑप्शन होगा. जानकारी के मुताबिक, सिमुलेटर एक ट्रक में फिट होना चाहिए और इसका वजन करीब 6.5 टन तक होगा. यह –10°C से 45°C तापमान में काम करेगा और रोजाना 12 से 16 घंटे तक संचालित हो सकेगा. 

इसमें 30 मिनट का बैक‑अप पावर भी होगा. सिमुलेटर की सर्विस लाइफ 15 साल तय की गई है और कंपनी को प्रोडक्शन बंद करने से दो साल पहले सूचना देना अनिवार्य होगा. ये AI‑आधारित सिमुलेटर भारतीय सेना की ट्रेनिंग को ज्यादा आधुनिक और सुरक्षित बनाएंगे और मौजूदा दौर की आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में मदद करेंगे.

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