लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव जारी है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनो सेना प्रमुखों से मुलाकात की. सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के साथ चल रहे गतिरोध पर चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं. बैठक में शामिल होने वालों में तीनों सेनाओं के प्रमुख, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत शामिल हैं. विदेश सचिव के साथ इससे पहले एक अलग बैठक आयोजित की गई थी. सूत्रों ने कहा कि पीएम मोदी के साथ बैठक से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीन सेवा प्रमुखों से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी. बैठकों का ये दौर ऐसे समय चल रहा है जब सिक्किम और लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिकों की झड़पें हुई हैं.
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि बीजिंग लद्दाख के पास एक एयरबेस का विस्तार कर रहा है. तस्वीरों से यह भी खुलासा होता है कि चीन ने वहां लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं. एक दिन पहले ही चीन ने अपने दूतावास की वेबसाइट पर एक नोटिस में अपने उन नागरिकों को वापस भेजने की पेशकश की, जो अपने घर लौटना चाहते थे.
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गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है और 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद यह सबसे बड़ी सैन्य तनातनी का रूप ले सकती है. उच्च पदस्थ सैन्य सूत्रों का कहना है कि भारत ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में अपनी स्थिति मजबूत की है. इन दोनों विवादित क्षेत्रों में चीनी सेना ने अपने दो से ढाई हजार सैनिकों की तैनाती की है और वह धीरे-धीरे अस्थायी निर्माण को मजबूत कर रही है.
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