- भारत मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की गति अगले तीन से चार दिनों तक धीमी रहने की संभावना है.
- इस साल जून में देश में औसतन से लगभग चालीस प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है.
- केंद्रीय भारत में जून के पहले अठारह दिनों में औसतन से तिरेसठ प्रतिशत कम बारिश हुई है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार अगले 3-4 दिन और धीमी रहने की आशंका है. भारत मौसम विभाग ने शुक्रवार को जारी अपने ताजा पूर्वानुमान रिपोर्ट में कहा कि 23 जून, 2026 के आसपास महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं.
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशि कांत ने एनडीटीवी से कहा कि इस बार मॉनसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान है. पिछले कुछ दिनों में अरब सागर में धुंधलापन नहीं बन पायी है. अब उम्मीद है कि 23 जून के आसपास मॉनसून फिर सक्रिय होगा. मॉनसून के मुंबई पहुंचने की नार्मल डेट 11 जून है. लेकिन शुक्रवार को जारी भारत मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के मुताबिक, मॉनसून के 23 जून से पहले मुम्बई पहुंचने की उम्मीद कम है.
औसत से काफी कम बारिश रिकॉर्ड
इस साल जून महीने के दौरान अब तक देश में औसत से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है. भारत मौसम विभाग ने गुरुवार को रिपोर्ट जारी कर कहा कि इस साल 01 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गयी है. आमतौर पर 01 जून से 18 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल 01 जून से 18 जून के बीच सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है.
18 दिनों के दौरान औसत से 46% कम बारिश
सबसे ज़्यादा कमी सेंट्रल इंडिया क्षेत्र में दर्ज़ की गयी है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज़ की गयी है. दूसरी सबसे ज़्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में देखी गयी, जहां इन 18 दिनों के दौरान औसत से 46% कम बारिश हुई है, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 21% रही. उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश औसत से 2% कम रिकॉर्ड की गयी है. इसकी एक बड़ी वजह दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का कमज़ोर पड़ना है. औसत से कम बारिश होने का असर देश के बड़े जलाशयों में दिख रहा है.
पानी का लाइव स्टोरेज लेवल 13.37% कम
सेंट्रल वाटर कमीशन की 18 जून को जारी जलाशय भंडारण बुलेटिन के मुताबिक 18 जून को देश के 166 बड़े जलाशयों में उपलब्ध लाइव स्टोरेज 50.457 BCM था. हालांकि, पिछले साल इस अवधि में इन जलाशयों में उपलब्ध लाइव स्टोरेज 58.249 BCM था. यानि, पिछले साल के मुकाबले इन बड़े जलाशयों में 18 जून तक पानी का लाइव स्टोरेज लेवल 13.37% कम है.
देश के पश्चिमी क्षेत्र, विशेषकर गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के 53 बड़े जलाशयों में भी पानी का स्तर पिछले साल से कम हो गया है. सेंट्रल वाटर कमीशन की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 18 जून को इन 53 बड़े जलाशयों में कुल लाइव स्टोरेज 11.125 BCM था, जो इनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 29.20% है. जबकि, पिछले साल इसी अवधि के दौरान स्टोरेज 31.72% था, यानि इस साल का स्टोरेज लेवल पिछले साल के स्टोरेज लेवल से कम है. इसे देखते हुए मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में प्रशासन ने पानी के इस्तेमाल को रेशनलाइज करने का फैसला किया है. पूर्वी भारत के 27 बड़े जलाशयों और दक्षिणी भारत के 47 बड़े जलाशयों में भी पानी का स्टोरेज लेवल पिछले साल के मुकाबले 18 जून तक कम रिकॉर्ड किया गया है.
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