संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास कर देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं महाराष्ट्र कैडर की आईएएस सौम्या शर्मा एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी नई उपलब्धि है, जहां उन्हें उनके पति आईपीएस अधिकारी अर्चित चंदक के साथ एक प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है.
CM 150 Days E-Governance Program में मिला सम्मान
सौम्या शर्मा ने खुद इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की. उन्होंने बताया कि CM 150 Days E-Governance Program के तहत अमरावती नगर निगम के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें माननीय मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया.
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस कार्यक्रम के जरिए ई-गवर्नेंस आधारित सेवा वितरण को नई गति मिली है, जिसमें AI और Blockchain जैसी आधुनिक तकनीकों को भी कामकाज का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है.

ias soumya sharma IPS archit chandak egovernance award amravati
टीम वर्क को दिया श्रेय
सौम्या शर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पूरी टीम को दिया. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड समय में सभी पहलों को पूरा करना टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है. अमरावती नगर निगम द्वारा किए गए कामों को इस कार्यक्रम के तहत खास सराहना मिली है.
पति अर्चित चंदक के साथ मिला सम्मान
इस सम्मान को और भी खास बनाते हुए सौम्या शर्मा ने बताया कि यह अवॉर्ड उन्हें उनके पति आईपीएस अधिकारी अर्चित चंदक के साथ मिला. उन्होंने इसे “सोने पर सुहागा” बताया और कहा कि साथ मिलकर काम करना और साथ में सम्मान पाना उनके लिए गर्व का पल है.

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संघर्ष से सफलता तक की मिसाल
सौम्या शर्मा वही आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने कम उम्र में सुनने की क्षमता खोने जैसी बड़ी चुनौती का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी. महज चार महीने की तैयारी में पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल करना उनकी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है.
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज सौम्या शर्मा और अर्चित चंदक की जोड़ी युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है. उनकी यह नई उपलब्धि दिखाती है कि अगर संकल्प मजबूत हो और टीमवर्क का साथ मिले, तो प्रशासनिक सेवा में भी नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं.

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आईएएस सौम्या शर्मा का जीवन परिचय
सौम्या शर्मा महाराष्ट्र कैडर की आईएएस अधिकारी हैं, जिनकी कहानी संघर्ष, साहस और उपलब्धि से भरी हुई है. सौम्या शर्मा का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ. उनके माता-पिता दोनों मेडिकल प्रोफेशनल हैं. बचपन में ही उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली से पूरी की.
16 साल की उम्र में सौम्या ने धीरे-धीरे अपनी सुनने की क्षमता खो दी, जो किसी के लिए बड़ी चुनौती होती. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को लगातार आगे बढ़ाया. उन्होंने दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU Delhi) से कानून (Law) की पढ़ाई पूरी की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में सुनने में अक्षम छात्रों के लिए आरक्षण की मांग भी की, जो उनके सामाजिक सोच को दर्शाता है.
सौम्या शर्मा की UPSC में सफलता
सौम्या ने UPSC की तैयारी शुरू की और सिर्फ चार महीने की कड़ी तैयारी के बाद पहली ही कोशिश में परीक्षा पास कर ली.
- प्रीलिम्स: पहले ही प्रयास में सफलता.
- मेंस: तेज बुखार के बावजूद परीक्षा दी और सफल रहीं.
- कैटेगरी: उन्होंने जनरल कैटेगरी से परीक्षा दी, दिव्यांग (PWD) आरक्षण का सहारा नहीं लिया.
- ऑल इंडिया रैंक: 9 (पहले प्रयास में)
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