"पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में मैं किसी का पक्ष नहीं लेने वाली", अशोक गहलोत से मुलाकात में बोलीं सोनिया गांधी

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस मुलाकात के दौरान सोनिया गांधी ने ये साफ कर दिया है कि वो पार्टी अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में किसी भी नेता विशेष का पक्ष नहीं लेंगी.

सोनिया गांधी ने कहा - पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए नहीं लेंगी किसी नेता का पक्ष

नई दिल्ली:

कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव को लेकर पार्टी के अंदर गहमा गहमी तेज हो गई है. बुधवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संबंध में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. हालांकि, सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस मुलाकात के दौरान सोनिया गांधी ने ये साफ कर दिया है कि वो पार्टी अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में किसी भी नेता विशेष का पक्ष नहीं लेंगी. खास बात ये है कि अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात से पहले कल देर रात पार्टी विधायकों की एक मीटिंग की थी. और उन्हें बताया था कि वो कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में गहलोत ने विधायकों से कहा कि पहले वह राहुल गांधी को चुनाव लड़ने के लिए मनाएंगे और अगर वो नहीं माने तो खुद नामांकन करेंगे.

बैठक में मौजूद सूत्रों ने बताया कि अशोक गहलोत ने विधायकों से कहा कि वो बुधवार को दिल्ली जाएंगे और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे. फिर शाम में फ्लाइट से केरल जाएंगे, जहां राहुल गांधी पदयात्रा कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि गहलोत ने कहा कि वह वहां राहुल गांधी को चुनाव लड़ने के लिए अंतिम बार मनाने की कोशिश करेंगे, अगर वो नहीं माने तो खुद दिल्ली आकर नामांकन करेंगे. गहलोत ने कहा कि पार्टी आलाकमान जैसा कहेगा, वैसा करेंगे. उन्होंने कहा कि वो पार्टी के वफादार सिपाही हैं.

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उधर, कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले कई कांग्रेसी नेता इस पद के लिए खुदको रेस में बता रहे हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने NDTV से बात करते हुए इस पद के लिए अपने नाम को भी शामिल किए जाने का इशारा किया है. उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा कि आप मुझे इस रेस बाहर क्यों रख रहे हैं. खास बात ये है कि दिग्विजय सिंह से पहले अशोक गहलोत और शशि थरूर भी इस पद के लिए खुदको दावेदार बताया है. कांग्रेस ने इसी साल उदयपुर में हुए बैठक में "एक व्यक्ति एक पद" के नियम को लागू करने का तय किया था. लेकिन अशोक गहलोत ने एक साथ तीन जिम्मेदारियां निभाने की बात कहकर ये साफ कर दिया है कि वो राजस्थान सीएम पद को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.