- JEE परीक्षा में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, आखिर इसके लिए कौन से उपाय अपनाए गए
- IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने JEE एग्जाम के दौरान अपनाए गए उपायों के बारे में बताया
- उन्होंने कहा कि इन उपायों को अपनाकर दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से रोके जा सकते हैं.
देशभर में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट पेपर लीक को लेकर घमासान मचा हआ है. पेपर लीक से गुस्साए छात्रों ने दिल्ली के तंजर-मंतर पर विरोधभी जताया. इस बीच गौर करने वाली बात यह है कि JEE परीक्षा में कोई पेपर लीक नहीं हुआ. आखिर ऐसा क्या किया गया कि जालसाज JEE परीक्षा में पेपर लीक नहीं कर सके. IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने NDTV को बताया कि वो कौन से उपाय अपनाए गए जो कि JEE परीक्षा में कोई पेपर लीक नहीं हुआ. किस तरह से एग्जाम में पारदर्शिता रखी गई.
उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाकर दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक होने से रोका जा सकता है.कामाकोटी, पीएम मोदी की छह सदस्यीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का हिस्सा रहे. इस टास्क फोर्स को नीट पेपर लीक को लेकर हफ्तों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद बनाया गया. बहुत उम्मीदें हैं कि वे उन खामियों को दूर कर पाएंगे, जिन वजहों से सालों से देश का एग्जाम सिस्टम प्रभावित हुआ है.
JEE पेपर लीक क्यों नहीं हुआ?
कामाकोटी ने NDTV को इंजीनियरिंग एग्जाम का एग्जांपल देते हुए बताया कि परीक्षार्थियों की संख्या के मामले में इसमें कई गुना बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने जब 1985 में JEE एग्जाम दिया था, तब 5,000 अभ्यर्थी इसमें शामिल हुए थे. लेकिन आज इस एग्जाम के15 लाख उम्मीदवार हैं. उन्होंने बताया कि एग्जाम को बिना लीक पूरी पारदर्शिता से कराना कोई आसान काम नहीं था.
डिवाइस एग्जाम हॉल में ले जाने से कैसे रोका?
उन्होंने कहा कि हमने समय के साथ पेपर-पेन वाले टेस्ट से लेकर सब्जेक्टिव पेपर और फिर ऑप्टिकल सेंसर और शीट पहचानने वाली टेक्नोलॉजी तक का बदलाव हते देखा है. फिर हम इमेज प्रोसेसिंग और फिर कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग की ओर बढ़े. हमने इन सभी तरीकों को देखा और कई तरह की टेक्नोलॉजी अपनाईं. साथ ही दूसरी तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी देखा. जब एग्जाम देने वालों की संख्या 15 लाख हो तो पहचान की जांच, बायोमेट्रिक और हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर जैसी चीजें इस्तेमाल होती हैं. उन्होंने कहा हमने ऐसी कई नई टेक्नोलॉजी अपनाई हैं, जिससे डिवाइस के इस दौर में लोगों को डिवाइस अंदर लाने से रोका जा सके.
कामाकोटी ने कहा कि इस साल पेपर लीक की घटना इसलिए हुई क्योंकि 2024 में मिले सबक भुला दिए गए और रंगनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू किया ही नहीं गया. राधाकृष्णन कमेटी ने 250 से ज्यादा मजबूत सुझाव दिए थे.
NEET में एहतियात के बावजूद कैसे लीक हुआ पेपर?
उन्होंने कहा, "सच कहूं तो, NEET 2026 में NTA ने उनमें से कई सुझावों को माना, इसीलिए 3 मई को NEET का पेपर NTA के दफ्तर से निकलने के बाद प्रिंटिंग के लिए गया, बक्सों में रखा गया, ट्रंक में डाला गया, बांटा गया और आखिरकार 20 तारीख़ को परीक्षा के दिन उम्मीदवार के हाथों में पहुंचा." उन्होंने कहा कि पेपर लीक इनमें से किसी भी जगह पर नहीं हुआ. जैसा कि CBI ने बताया, " पेपर NTA से बाहर निकलने से पहले ही लीक हो गया था." दिक्कत यह थी कि किसी भी ऑपरेशन में जो भरोसे का एक आधार होता है, वह आधार ही फेल हो गया. इसी वजह से राधाकृष्णन कमेटी की कड़ी मेहनत और NTA की ओर से उनकी कई सिफारिशें लागू करने की कोशिशों के बावजूद, इस साल पेपर लीक हो गया.
ये भी पढ़ें-नीट पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा कदम, 13 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं