- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद को युद्ध की स्थिति मानकर नई सुरक्षा नीति बनाई
- भारत ने ऑपरेशनल प्री-एम्प्शन लागू कर सीमा पार सक्रिय आतंकवादी लॉन्च पैड्स को नष्ट करने का अधिकार सुरक्षित रखा
- ग्रे-ज़ोन वारफेयर को ओपन कॉन्फ्लिक्ट माना गया और पाकिस्तान के आर्थिक और कूटनीतिक आधारों पर चोट की जा रही है
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सुरक्षा नीति में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव था 'आतंकवाद' को केवल एक कानून-व्यवस्था की समस्या न मानकर उसे 'युद्ध' (Act of War) के रूप में परिभाषित करना. इस रणनीति के तहत पांच बड़े नीतिगत बदलाव किए गए हैं.
1. 'ऑपरेशनल प्री-एम्प्शन' (Operational Pre-emption)
अब भारत आतंकी हमला होने का इंतज़ार नहीं करता. नई रणनीति के तहत, अगर खुफिया जानकारी मिलती है कि सीमा पार आतंकी लॉन्च पैड्स सक्रिय हैं, तो भारत उन्हें "युद्ध की स्थिति" मानकर नष्ट करने का अधिकार सुरक्षित रखता है. पहलगाम हमले के बाद किया गया ऑपरेशन सिंदूर इसी रणनीति का पहला बड़ा उदाहरण था.
2. ग्रे-ज़ोन वारफेयर (Gray-Zone Warfare) का जवाब
पाकिस्तान लंबे समय से 'छद्म युद्ध' (Proxy War) लड़ रहा था. पहलगाम हमले के बाद, भारत ने इसे 'ग्रे-ज़ोन' से निकालकर 'ओपन कॉन्फ्लिक्ट' की श्रेणी में डाल दिया. इसका मतलब है कि अब भारत आतंकी घटनाओं का जवाब केवल आतंकियों को मारकर नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आर्थिक और कूटनीतिक आधारों पर चोट करके देता है (जैसे सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना).
3. कूटनीतिक आक्रामकता (Diplomatic Aggression)
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्टैंड लिया है कि "आतंकवाद का समर्थन करना युद्ध छेड़ने के बराबर है. इसी वजह से पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने के लिए भारत ने सभी द्विपक्षीय वार्ताओं और समझौतों को 'युद्धकालीन प्रोटोकॉल' के तहत निलंबित कर दिया है.
4. नागरिक सुरक्षा को सैन्य प्राथमिकता
पहलगाम हमला पर्यटकों पर हुआ था. इसके बाद, पर्यटन क्षेत्रों की सुरक्षा का जिम्मा केवल स्थानीय पुलिस के बजाय 'स्नो लेपर्ड्स' जैसी सैन्यीकृत इकाइयों को दिया गया. अब किसी भी बड़े पर्यटक स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था वैसी ही होती है जैसी किसी सैन्य बेस की.
5. आर्थिक युद्ध (Economic Warfare)
आतंकवाद को युद्ध मानने की रणनीति का ही हिस्सा है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ व्यापार पूरी तरह बंद कर दिया. युद्ध में आप दुश्मन देश के साथ व्यापार नहीं करते, और भारत ने इसी सिद्धांत को लागू किया है.
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