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Explained: हर 10,000 में से 4,363 लोग बोलते हैं हिंदी, अंग्रेजी सिर्फ 2.6 लाख लोगों की फर्स्ट लैंग्वेज

आंकड़ों के मुताबिक, भारत की 44 फीसदी आबादी की मातृभाषा हिंदी है. दूसरे नंबर पर बंगाली है, जिसे 8 फीसदी लोग बोलते हैं.

Explained: हर 10,000 में से 4,363 लोग बोलते हैं हिंदी, अंग्रेजी सिर्फ 2.6 लाख लोगों की फर्स्ट लैंग्वेज
भारत में 120 से ज्यादा मातृभाषाएं हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
Canva
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. CBSE की यह पॉलिसी 2026-27 से ही लागू हो गई है. CBSE की इस पॉलिसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हुई थीं. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, NCERT और CBSE को नोटिस जारी किया है.

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर अक्सर विवाद ही बना रहा है. ये विवाद अब तक जारी है. इस पॉलिसी के तहत, 9वीं के बाद छात्रों को दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी. तीसरी भाषा के रूप में छात्र कोई भारतीय या विदेशी भाषा चुन सकते हैं.

थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है. इस पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी. लेकिन जब भाषा को लेकर इतना बवाल मचा है तो ये जानना भी जरूरी है कि भारत में भाषाओं को लेकर आंकड़े क्या कहते हैं? 

भारत में कितनी मातृ भाषाएं?

भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक कथन बहुत लोकप्रिय है- 'चार कोस पर पानी बदले, आठ कोस पर वाणी...' इसी से भारत में भाषाओं की विविधता का पता लगता है.

भारत में भाषाओं को लेकर आधिकारिक आंकड़े 2011 की जनगणना से पता चलते हैं. 2011 की जनगणना में जब लोगों से पूछा गया कि उनकी मातृभाषा कौनसी है? तो अलग-अलग लोगों ने कई सारे नाम बताए और इस तरह से 1,369 नाम निकलकर आए. इनके अलावा, 1,474 भाषाओं के नाम बहुत अजीब थे और उन्हें बोलने वाले भी बहुत कम थे. आखिर में कांट-छांट के बाद कुल 121 मातृ भाषाएं निकलीं. किसी भाषा को मातृभाषा तब माना जाएगा, जब उसे बोलने वाले 10 हजार से ज्यादा लोग होंगे.

इनमें से 22 भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है. ये हैं- असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, संथाली, मैथिली और डोंगरी.

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हिंदी बोलने वाले कितने?

जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. 2011 में 121 करोड़ की आबादी में से 52.83 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलने वाले थे. इसका मतलब हुआ कि भारत की 43.6% आबादी की भाषा हिंदी है. 

हिंदी के बाद बंगाली का नंबर आता है, जिसे बोलने वाले 9.7 करोड़ यानी 8% लोग हैं. तीसरे नंबर पर मराठी है, जिसे 8.30 करोड़ यानी लगभग 7% आबादी बोलती है. 8.11 करोड़ लोग तेलुगु और 6.90 करोड़ लोग तमिल बोलते हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, 1971 से 2011 तक हिंदी बोलने वालों की आबादी 160% से ज्यादा बढ़ी है. 1971 तक 20.27 करोड़ भारतीय हिंदी बोलते थे. 

पूरे भारत में 10 हजार लोगों में से 4,363 लोग हिंदी बोलते हैं. हिंदी बोलने वाले ज्यादातर लोग उत्तर भारत में हैं. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ज्यादातर आबादी हिंदी बोलती है.

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हिंदी बोलने वाले इतने कैसे?

भारत की लगभग 44 फीसदी आबादी हिंदी बोलती है. ये आंकड़ा हर जनगणना में बढ़ा ही है. 1971 तक लगभग 37 फीसदी आबादी हिंदी बोलती थी. 2011 तक ये बढ़कर 44 फीसदी तक पहुंच गई. 

हिंदी के उलट कई भाषाओं को बोलने वालों की आबादी 2001 की तुलना में 2011 में घटी ही है. बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, उर्दू, कन्नड़, उड़िया, मलयालम, पंजाबी, असमिया और मैथिली जैसी भाषाओं को बोलने वालों की आबादी 2011 में थोड़ी कम हो गई. 

उदाहरण के तौर पर- 2001 तक बंगाली बोलने वालों की आबादी 8.11% थी, जो 2011 में घटकर 8.03% हो गई. तेलुगु बोलने वाले 7.19% से घटकर 6.70% हो गए. उर्दू बोलने वाली आबादी भी 5.01% से कम होकर 4.19% हो गई.

ऐसे में सवाल उठता है कि हिंदी बोलने वालों की आबादी इतनी कैसे है? इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हिंदी उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों की मुख्य भाषा है. इसके अलावा, दूसरी वजह यह है कि हिंदी के अंदर ही 50 से ज्यादा भाषाओं को रखा गया है. इनमें भोजपुरी भी है, जिसे 5 करोड़ से ज्यादा लोग बोलते हैं. अगर हिंदी के तहत लिस्ट की गई दूसरी भाषाओं को हटा दिया जाए तो हिंदी बोलने वालों की संख्या घटकर 32.22 करोड़ रह जाएगी.

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और अंग्रेजी कितने बोलते हैं?

वैसे तो हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भी केंद्र सरकार की दो आधिकारिक भाषाओं में से एक है, लेकिन इसे आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है. 

मातृभाषा के तौर पर देखें तो 2011 में भारत में अंग्रेजी बोलने वाले सिर्फ 2.60 लाख लोग ही थे, जो कुल आबादी का सिर्फ 0.02% ही होता है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ 2.60 लाख लोग ही अंग्रेजी बोलते हैं. 2011 में 8.3 करोड़ लोगों के अंग्रेजी दूसरी भाषा थी. जबकि 4.6 करोड़ लोगों के लिए यह तीसरी भाषा थी. इन सबको जोड़ लिया जाए तो 2011 में 10% से ज्यादा आबादी अंग्रेजी बोलती थी. 

मातृभाषा के रूप में अंग्रेजी बोलने वाले सबसे ज्यादा लोग महाराष्ट्र के हैं. महाराष्ट्र में 1.06 लाख से ज्यादा लोगों की मातृभाषा अंग्रेजी थी. दूसरे नंबर पर कर्नाटक है, जहां 23,227 लोग अंग्रेजी बोलते थे. जबकि, बंगाल में 14,945 लोगों की मातृभाषा अंग्रेजी थी.

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